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कैंसर से जुड़ी वो कहानी, जिसकी वजह से रतन टाटा ने स्वास्थ्य को समर्पित किया जीवन का आखिरी वक्त

टाटा भारत का एक ऐसा ब्रांड है जो इस देश के हर घर में किसी ना किसी रूप में मौजूद होता है। सूई से लेकर हवाई जहाज तक, साबुन से लेकर कार तक, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक कहां नहीं है टाटा की पहुंच। हर जगह टाटा छाया हुआ है। उद्योग धंधों जरिए देश की सेवा करने वाला ये घराना चैरिटी और समाज सेवा से जुड़े कार्यों में भी आगे रहता है।

अपनी काबिलियत और व्यवहार से देश के हर नागिरक के दिल में जगह बनाने वाले 85 वर्षीय रतन टाटा ने अब अपने जीवन के अंतिम वर्षों को लोगों के स्वास्थ्य के लिए समर्पित कर दिया है। सवाल उठता है कि स्वास्थ्य को लेकर टाटा घराना इतनी संवेदनशीलता क्यों दिखाता है, तो इसके पीछे एक इस घराने से जुड़ी एक कहानी जिसके बारे में आपको आगे बताएंगे।

आपको बता दें कि गुरुवार को असम में पीएम मोदी ने 7 हाईटेक कैंसर सेंटर्स का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में मौजूद रतन टाटा ने कहा- ‘मैं अपनी जिदंगी के आखिरी साल स्‍वास्‍थ्‍य को समर्पित करता हूं। असम को ऐसा राज्‍य बनाएं जो सबको पहचाने और जिसको सब पहचानें।’

टाटा से जुड़ा वो किस्सा..

मुंबई के परेल में स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर का हेल्थ सेक्टर में एक बड़ा योगदान है। इस सेंटर के शुरू होने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। 1932 में ल्यूकेमिया यानी रक्त कैंसर की वजह से लेडी मेहरबाई टाटा की मौत हो गई थी।

इसके बाद उनके पति दोराबजी टाटा ने भारत में वैसी सुविधाओं वाला एक अस्पताल खोलने का सपना देखा, जैसे विदेशी अस्पताल में उनकी पत्नी का इलाज हुआ था। दोराबजी टाटा की मौत के बाद इस सपने को साकार करने की कोशिशें नौरोजी सकलतवाला ने भी कीं।

हालांकि, जेआरडी टाटा की कोशिशों के बाद टाटा मेमोरियल सेंटर का सपना साकार हो सका। 1957 में इसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने अधीन ले लिया, लेकिन जेआरडी टाटा और होमी भाभा इसके कामकाज पर नजर रखते रहे। यह अस्पताल करीब 80 बेड से शुरू हुआ था और आज इसमें 600 से भी अधिक बेड हैं। पहले यह 15 हजार स्क्वायर मीटर में था, जो अब 70 हजार स्क्वायर मीटर तक पहुंच चुका है। यहां दुनिया भर के कैंसर मरीजों का इलाज किया जाता है।

गरीबों के इलाज की चिंता

स्वास्थ्य के क्षेत्र में टाटा मेडिकल सेंटर रतन टाटा के योगदान का जीता-जागता सबूत है। यह कोलकाता के बाहर इलाके राजारहाट में स्थिति है। 16 मई 2011 को रतन टाटा ने इसका उद्घाटन किया था। इस सेंटर में खासकर गरीब लोगों के कैंसर का इलाज किया जाता है।

हालांकि, यहां बाकी लोगों का भी इलाज होता है और इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल टाटा मेडिकल सेंटर में गरीबों को इलाज मुहैया कराने के लिए किया जाता है। यहां करीब 300 बेड हैं, जिसमें से लगभग आधे बेड गरीब लोगों के इलाज के लिए रिजर्व हैं। टाटा मेडिकल सेंटर का पूरा खर्ज चैरिटी से मिले पैसों से पूरा होता है। इस सेंटर को टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के जरिए मैनेज किया जाता है।

हेल्थ और फिटनेस स्टार्टअप CureFit में भी रतन टाटा ने निवेश किया हुआ है। वह पिछले कई सालों से हेल्थकेयर सेक्टर को मजबूत करने की कोशिशें करते रहे हैं और अब जिंदगी के बचे दिनों में वह सिर्फ स्वास्थ्य के लिए काम करना चाहते हैं। वह कहते हैं कि हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज में दुनिया को बदलने की ताकत है। टाटा ट्रस्ट तेजी से गांव-गांव तक हेल्थकेयर सुविधाएं पहुंचाने में लगा है।

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