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‘CAA, राममंदिर, धारा 370 हो गया, अब कॉमन सिविल कोड की बारी’, अमित शाह का आया बड़ा बयान

क्या सरका जल्द समान नागरिक संहिता यानि कॉमन सिविव कोड को लागू करने की तैयारी है में है। यह सवाल इसलिए उठा है कि देश के गृहमंत्री और बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने भोपाल में कॉमन सिविल कोड को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के बयान ने इस पर सुगबुगाहट शुरू कर दी है। शाह ने कहा कि हमारी पार्टी की केंद्र सरकार ने धारा 370, राम जन्मभूमि, तीन तलाक और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) जैसे अधिकांश मुद्दों को हल कर दिया है। कॉमन सिविल कोड जैसे जो कुछ बचे हैं, उन्हें भी आने वाले वर्षों में हल कर दिया जाएगा।

उत्तराखंड से होगी शुरुआत

गृहमंत्री ने मध्य प्रदेश से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में कहा कि कॉमन सिविल कोड का प्रयोग उत्तराखंड में किया जाएगा। वहां, इसे अमल में लाने के बाद हालात का जायजा लेंगे और फिर पूरे देश में इसे लागू किया जाएगा। यह लोकसभा चुनावों से पहले करने की कोशिश की जा रही है।

अमित शाह का बयान काफी अहम

अमित शाह का यह कहना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि राम मंदिर, धारा 370 और कॉमन सिविल कोड भाजपा के तीन मुख्य मुद्दे रहे हैं। राम मंदिर बनाने और धारा 370 को हटाने के मुद्दे हल चुके हैं। ऐसे में कॉमन सिविल कोड ही एकमात्र ऐसा मुद्दा है, जो भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में लंबित है। इसे लागू करने का दबाव संघ भी बना रहा है।

क्या है कॉमन सिविल कोड

कॉमन सिविल कोड यानी सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून। इस समय भारत में शादी, तलाक, दत्तक और संपत्तियों के उत्तराधिकार को लेकर अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ लागू है। इसे एकरूपता देते हुए सभी नागरिकों के लिए समान कानून की बात यह कोड करता है। संविधान में भी इसे लागू करने की बात कही गई है। हालांकि, अलग-अलग धर्मों के विरोध के चलते राजनीतिक पार्टियां इस पर कुछ करने से बचती रही है। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में देश में कॉमन सिविल कोड की जरूरत बता चुका है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

शाह ने कहा कि देश के स्वतंत्र होते ही कांग्रेस सत्ता में बैठ गई थी। इस वजह से कांग्रेस का आंदोलनों से नाता नहीं रहा। इसके उलट भाजपा आंदोलनों से ही आगे आई है। अगले चुनाव से पहले राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष हो जाएंगे। इससे चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसका भाजपा को फायदा ही मिलेगा। अभी कांग्रेस और नीचे जाएगी।

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