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चार धाम यात्रा में गैर-हिंदुओं का होगा वेरिफिकेशन, उत्तराखंड मे तेजी से बढ़ी एक समुदाय की आबादी

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा को लेकर राज्य की धामी सरकार काफी गंभीर है। आपको बता दें कि इस साल उत्तराखंड में 3 मई से चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। यात्रा के शुरू होने से पहले ही कई हिन्दू धार्मिक संगठन के लोगों की ओर से चार धाम यात्रा में सभी गैर हिंदुओं को प्रवेश पर रोक लगाने की मांग चल रही है। इस मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जबाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रदेश शांत रहना चाहिए और प्रदेश की धर्म संस्कृति बची रहनी चाहिए।

वेरिफिकेशन कराएगी राज्य सरकार

सीएम धामी ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार अपने स्तर से एक अभियान चलाएगी और जिन लोगों का यहां ठीक प्रकार से वेरिफिकेशन नहीं है। उन सभी का वेरिफिकेशन कराया जाएगा। इसके साथ ही इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा कि उत्तराखंड में कोई ऐसा व्यक्ति ना आए जिससे यहां की स्थिति खराब हो।

उत्तराखंड में मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है!

बीते कुछ समय पहले उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) को लेकर एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड के चार धाम यात्रा वाले मार्ग पर तेजी से विशेष समुदाय की आबादी बढ़ रही है, जिसके बाद कुछ लोग इसे स्वाभाविक नहीं मान रहे हैं। इसी प्रकरण के बाद उत्तराखंड में चार धाम यात्रा में तेजी से गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठ रही है।

हिमालय हमारा देवालय अभियान

इसी मामले को उठाते हुए कुछ दिनों पहले शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष एवं शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र लिखा था, जिसको कई लोगों ने समर्थन भी किया था। पत्र में स्वामी आनंद ने लिखा कि काली सेना के साथ मिलकर परिषद ने ‘हिमालय हमारा देवालय’ अभियान चलाया है। इसमें चार धाम यात्रा में गैर-हिन्दुओं के प्रवेश को वर्जित करने के लिए जनता को जागरूक किया गया है।

आगे उन्होंने कहा कि हिमालय विश्व के सनातन धर्म के लोगों के लिए अध्यात्मिक राजधानी है। इस कारण से चार धाम यात्रा में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए । इसके साथ उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में इलाके में गैर हिंदुओं का प्रवेश हो रहा है जिससे क्षेत्र में अपराध बढ़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड में भू कानून में भीं संशोधन की मांग की।

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