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योगी सरकार बड़ा फैसला, कोरोना संक्रमित कर्मचारियों को 1 महीने की छुट्टी देने का निर्देश

पूरे देश में कोरोना ने फिर अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों में कोरोना संक्रमितों की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। राज्य में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। इसमें बच्चों में भी कोरोना के मामले देखे जा रहे हैं। हालांकि प्रदेश सरकार कोरोना संक्रमण को लेकर किसी भी स्तर पर कोताही बरतना नहीं चाहती है। इसलिए योगी सरकार ने संक्रमित कर्मचारियों को लेकर नये निर्देश जारी कर दिये गये हैं, जिसमें 1 महीने तक की लंबी छुट्टी का भी निर्देश दिया गया है।

योगी सरकार ने दिया येनिर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक पत्र में कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश स्वीकृत करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक “कोविड-19 से संक्रमित कर्मचारियों को अधिकतम एक महीने तक का कैजुअल अवकाश दिया जा सकता है,” ये निर्देश 18 अप्रैल को जारी किये गये हैं।

जारी आदेश के मुताबिक कर्मचारी जिस घर या आवास में रह रहा है और यदि उसके साथ रह रहे किसी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण हो गया तो संबंधित कर्मचारी को 21 दिनों की अवधि तक की छुट्टी दी जा सकती है। इसके अलावा यह निर्देश भी दिया गया है कि जिस क्षेत्र को कंटेंमेंट जोन घोषित किया गया हो उस क्षेत्र में रहने वाले कर्मचारी को भी कंटेंमेंट जोन घोषित रहने तक विशेष अवकाश स्वीकृत कर दिया जाए।

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यूपी के 7 जिलों में अलर्ट

बता दें कि उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddh Nagar), गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत और लखनऊ में लगातार कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। इन जिलों मे मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, मास्क नहीं लगाने पर जुर्माना लग सकता है।

बच्चे हो रहे शिकार

कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते लोगों में एक बार फिर डर का माहौल पैदा हो रहा है। लगातार स्कूली बच्चे भी कोविड की चपेट में आ रहे हैं। नोएडा यानि गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम का कहना है कि कोरोना के मामले बढ़े हैं, इसे हम नकार नहीं सकते। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई न तो भ्रम पैदा करें और न ही अफ़वाहों पर ध्यान दे।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में 470 सरकारी जबकि 1430 प्राइवेट कुल 2000 स्कूल -कॉलेज हैं, स्कूल को अडवाइजरी जारी की गई है कि किसी को भी कोई लक्षण मसहूस हो तत्काल हेल्प लाइन पर कॉल करके जानकारी दें और अविभावक अपने बच्चों के अंदर जरा भी लक्षण दिखाई दें तो स्कूल न भेजें।

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