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करौली में इंसानियत की मिसाल बनी हिंदू महिला, दंगे के दौरान 15 मुसलमानों के लिए ढाल बन गई

राजस्थान के करौली में जब रामनवमी के जलूस पर पथराव हुआ और उसके बाद जब हिंसा फैली तो दंगे में कई लोग फंस गए। हिंसा के दौरान करीब 15 मुस्लिम समुदाय के लोग भी फंस गए थे जिनके लिए एक हिंदू महिला फरिश्ता बन कर आईं और सब को सुरक्षित बचा लिया।

मधुलिका और संजय बने ढाल

जो लोग, दूसरे की मदद के लिए सामने आए, वे बेशक साधारण लोग थे लेकिन मदद का उनका जज्‍बा बेहद बड़ा था। इसमें महिला मधुलिका सिंह भी शामिल हैं। मधुलिका और उनके भाई संजय ने अपने परिवार की परवाह किए बिना करीब 15 मुस्लिमों को घर में शरण दी और इनकी जान बचाने के लिए निडर हो कर दंगाइयों का सामना किया।

मधुलिका सिंह जादौन करौली के सांप्रदायिक तनाव के बीच में लोगों के लिए मददगार बनीं, इस अकेली महिला ने ने दंगाइयों का सामना करते हुए करीब 15 लोगों की जान बचाई। मधुलिका की बाजार में एक कपड़े की दुकान है। दो अप्रैल को जुलस जब इस बाजार से गुज़र रहा था तो दंगा भड़क गया। मधुलिका ने तोड़फोड़ और आगजनी की आवाज सुनी। उन्होंने देखा कि लोग दुकानों बंद करके भाग रहे हैं। लेकिन सामने से उग्र भीड़ आ रही थी,ऐसे में मधुलिका डरी नहीं।

उन्‍होंने दंगे में फंसे लोगों को अंदर बुलाकर अपने घर में शरण दी। ये लोग उनके घर में करीब दो घंटे तक रहे। मधुलिका बताती हैं, ‘” मैं बाहर आई और पूछा कि शटर क्यों डाउन कर रहे हो तो उन्होंने जवाब दिया कि दंगा हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने उन्‍हें अपने घर में शरण देकर गेट लॉक कर दिया। मैंने उनको इंसानियत की नाते से बचाया है।

” उन्‍होंने बताया कि अफरातफरी का माहौल था। भीड़ दुकानों में तोड़ फोड़ कर रही थी और आग भी लगा रही थी। उनके भाई संजय सिंह ने बताया, ” लगभग 16-17 लोग थे, जिनमें बारह तरह मुस्लिम थे और चार या पांच हिन्दू समुदाय से थे। हमने उन सबसे कहा कि आप घबराये नहीं, आप लोग यहां सुरक्षित है।”

मिथिलेश सोनी ने बुझाई आग

ऐसी ही शख्‍स हैं मिथिलेश सोनी, जो ब्यूटी पार्लर चलाती है जिन्‍होंने तीन महिलाओं के साथ बाल्टी भर-भर कर आस पास की दुकानों में लगी आग को बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने यह नहीं पूछा कि दुकानें किसकी है और उनका धर्म क्या है? उन्‍होंने बताया, ‘हमने मुस्लिम बच्चों को बाहर नहीं निकलने दिया क्योंकि बाहर लोग हिंसा पर उतारू थे। फिर हमने देखा कि दुकानों में आग लगाइ जा रही है, ऐसे में हमने बाल्टियों टंकी से भर-भरकर पानी डाला।’ करौली के इस मुख्य बाजार में सालों से दोनों संप्रदाय के लोग अपना धंधा करते है।

जिन मुस्लिम समुदाय के लोगों की जान मधुलिका और संजय ने बचाई, वे कहते हैं कि वे जिंदगीभर इनके अहसानमंद रहेंगे। दुकानदार मोहम्मद तालिब खान बोले, “बाहर भगदड़ मच गई। पत्थरबाजी हो रही थी और लोग डंडे लेकर घूम रहे थे। दीदी ने हमें बुलाया। अध्यक्ष सदर बाजार व्‍यापार संघ राजेंद्र शर्मा बताते हैं,”हमारे बाजार में हर जाति और हर वर्ग के व्यापारी हैं। करीब 50 दुकान मुसलमान भाइयों की हैं। ऐसी स्थिति कभी नहीं रही कि दरारें पड़ें। हम चाहते है भाईचारा कायम रहे।

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