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श्रीलंका ने खुद को दिवालिया घोषित किया! कहा- विदेशी कर्ज नहीं चुका पाएंगे: फंस गया चीन का पैसा

सबसे बड़े आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे श्रीलंका ने मंगलवार को खुद को एक तरह से दिवालिया घोषित कर दिया है। श्रीलंका की सरकार ने ऐलान किया है कि वह 5,100 करोड़ डॉलर का विदेशी कर्ज अभी चुका नहीं पाएगी। इसके पीछे की वजह उसने ये बताई है कि देश को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से बेलआउट पैकेज नहीं मिल पाया है। श्रीलंका के ट्रेजरी सेक्रेटरी महिंद्रा सिरीवर्दने ने मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी कर ये ऐलान किया है।

दी गई जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2021 में श्रीलंका पर विदेशों का कुल कर्ज 3500 करोड़ डॉलर का था, जो महज एक साल में बढ़कर 5100 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है। श्रीलंका के कर्ज में ज्यादातर हिस्सा ऐसे कर्ज का है, जिसे न चुका पाने की उसे भारी कीमत देनी पड़ रही है।

श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने दूसरे देशों की सरकारों और अन्य क्रेडिटर्स से कहा कि मंगलवार के बाद जो भी ब्याज बकाया है. उसके भुगतान के लिए या तो इंतजार करना होगा या फिर श्रीलंकाई रुपये में पेमेंट एक्सेप्ट करना होगा।

आईएमएफ से बात जारी-श्रीलंका

श्रीलंका की सरकार ने कहा है कि आईएमएफ से बेलआउट पैकेज को लेकर बातचीत जारी रहेगी। सरकार ने दूसरे देशों से भी द्विपक्षीय सहयोग की उम्मीद जताई है। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के नए गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने कहा कि मौजूदा फॉरेन एक्सचेंज का इस्तेमाल जरूरी सामानों के इम्पोर्ट के लिए किया जाएगा।

कर्ज ने बनाया कंगाल

श्रीलंका का कुल एक्सटर्नल डेट (दूसरे देशों का कर्ज) 5,100 करोड़ डॉलर का है। पिछले साल देश पर कुल कर्ज 3,500 करोड़ डॉलर का था। इस तरह एक साल में देश का कर्ज 1,600 करोड़ डॉलर तक बढ़ गया।

सबसे ज्यादा चीन ने कर्ज दिया

श्रीलंका ने अपने कुल कर्ज का 47 फीसदी डेट बाजार से लिया है। वहीं, देश के कुल लोन में चीन का कर्ज 15 फीसदी के आसपास है। देश पर एशियन डेवलेपमेंट बैंक का 13 फीसदी, वर्ल्ड बैंक का 10 फीसदी, जापान का 10 फीसदी और भारत का 2 फीसदी कर्ज है।

यह द्विपीय देश अपनी आजादी के बाद से सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में लोग बार-बार बिजली की कटौती से हलकान हैं। वहीं, खाने-पीने के सामान और ईंधन की भारी किल्लत है।

इससे पहले श्रीलंका के फाइनेंस मिनिस्टर अली सबरी (Ali Sabry) ने कहा था कि फ्यूल और दवाइयों की सप्लाई को सुचारू करने और Economic Crisis को मैनेज करने के लिए श्रीलंका को अगले छह माह में लगभग 3 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी। इस फंड जुटाने के बारे में उन्होंने कहा था, “यह काफी कठिन काम है।”

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