समाचार

देखो शेर आया..मोदी का रुख देख अंदर मन मसोस कर रह गए बाइडेन, इज्जत दांव पर लगा आए थे बात करने

रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारत और भारत के प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को अंतर्राष्ट्रीय जगत में सर्वोपरि कर दिया है। इस जंग को लेकर भारत ने अपना जो रुख अपनाया है उससे पूरी दुनिया को समझ में आ गया है कि दशकों से चली आ रही भारत की तटस्थता की नीति में कितना दम है।वैसे तो ये नीति आजादी के समय से ही भारत की नीति रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में इसकी ताकत का एहसास पूरी दुनिया को हो गया है।

पहले जो सुपर पावर देश हमारी तटस्थता का मजाक उड़ाते थे, आज वो भारत का समर्थन पाने के लिए अपनी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगाने को तैयार हैं। सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की मुलाकात ने इस तथ्य को एक बार फिर दुनिया के सामने मजबूती से रख दिया है।

बाइडेन का दांव रहा फेल

रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपना रुख बदलने के लिए भारत पर बनाए गए सभी स्तर के दबावों को दरकिनार होता देख खुद राष्ट्रपति बाइडेटन ने सामने से मोर्चा संभालने का जोखिम उठाया, लेकिन नतीजा वही हुआ जिसकी कल्पना भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के मुताबिक कोई भी कर सकता है। रक्षा और विदेश मंत्रियों की 2+2 वार्ता से ठीक पहले राष्ट्रपति बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ वर्चुअल मीटिंग करके एक अकल्पनीय कोशिश की। आखिर, उन्हें अमेरिका के अंदर से उठ रही आवाज को सुनना था।

उन्होंने सांसदों की मांग के मुताबिक भारत को मनाने की कोशिश की कि वह रूस से मुंह मोड़ ले, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव का असर भला होता कहां है। मोदी ने साफ-साफ समझा दिया कि भारत, रूस के साथ अपने संबंधों की समीक्षा अपने हितों के आधार पर ही करेगा, इसका मापदंड किसी सुपर पवार का प्रेसर नहीं हो सकता।

मन मसोस कर रह गए बाइडेन

 बाइडेन-मोदी बातचीत में भारत से उम्मीद की गई कि वह यूक्रेन युद्ध में रूस के प्रति अमेरिका और नाटो की खिंची लाइन पर बढ़ने पर सहमति जता दे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बातचीत के दौरान मोदी के रुख को देख बाइडेन ने अपने अंदर की पूरी बात बाहर नहीं लाने में ही भलाई समझी और अंदर ही अंदर मन मसोस कर रह गए। फिर दोनों राष्ट्राध्यक्ष आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर बातचीत करने लगे।

मीटिंग खत्म होने के बाद अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया से कहा कि दोनों नेताओं ने काफी मैत्रीपूर्ण माहौल में करीब एक घंटा बातचीत की। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मॉस्को के साथ भारत के रक्षा एवं ऊर्जा संबंधों तक, कई मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि बाइडन ने भारत से यह मांग नहीं की कि वो रूस से कच्चे तेल का आयात रोक दे। वहीं, मोदी ने भी ऐसा कोई ठोस वादा नहीं किया।

अधिकारियों ने कहा, ‘हम भारत को यह नहीं कहने वाले कि उसे क्या करना चाहिए क्या नहीं।’ बाइडन प्रशासन के एक बड़े अधिकारी ने कहा, ‘दूसरे देशों अपना रास्ता तय करने का अधिकार है… यही कहा जा सकता है। हालांकि, हमारी इच्छा नहीं होगी कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दे।’

इज्जत दांव पर लगाकर आए थे बाइडेन

अक्सर मंत्रियों और अधिकारियों के बीच मीटिंग पहले ही होती है, उसके बाद राष्ट्राध्यक्षों की बातचीत होती है लेकिन इस मामले में राष्ट्रपति बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी को मनाने के लिए अपनी इज्जत दांव पर लगा दी। और सामान्य प्रोटोकॉल तोड़कर पहले ही मोदी से बातचीत करने के लिए आ गए।

हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध पर दोनों देशों की सोच में कितना बड़ा अंतर है, बाइडन-मोदी के बीच बातचीत से पहले ही पता चल चुका था। अमेरिका ने कहा था कि यूक्रेन पर रूस के बर्बर हमलों को लेकर गंभीर बातचीत होगी जबकि भारत के बयान में कहा गया था कि बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की जाएगी, दक्षिण एशिया, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और पारस्परिक हितों के वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। साफ है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे को अपने नजरिए से सहमत करने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की, लेकिन भारत-अमेरिका, दोनों ने एक-दूसरे को नैचुरल पार्टनर बताया।

Back to top button