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कश्मीर में फिर मस्जिदों, मदरसों में पनाह ले रहे आतंकी, साजिश को ऐसे दिया जा रहा अंजाम

कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद आतंकियों को पनाह लेने में काफी दिक्कत आ रही है। कश्मीर में शांति बढ़ने पर अब आम लोग पहले की तरह आतंकियों को ना तो पनाह दे रहे और ना समर्थन। इसे देखते हुए आतंकी फिर मस्जिदों और मदरसों का रुख कर रहे हैं। और मस्जिदों और मदरसों में पैठ बनाकर युवाओं को बरगला रहे हैं।

आपको बता दें कि आतंकवादी 1990 के दशक की शुरुआत में हजरतबल दरगाह और चरार-ए-शरीफ में छिपते थे और सुरक्षा बलों से उनकी झड़पें होती थीं। हाल में हुई कुछ मुठभेड़ों, विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों के विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान प्रायोजित दहशतगर्द पनाह लेने के लिए फिर से मस्जिदों और मदरसों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताह में कुलगाम, नैना बटपोरा और चेवा कलां में हुई तीन मुठभेड़ों में यही बात देखने को मिली। आतंकवादियों ने जानबूझकर मस्जिदों और मदरसों में आसरा ले रखा था। उन्होंने पहचान छिपाने और सुरक्षा बलों को गोलीबारी या बल प्रयोग करने के लिए उकसाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के दोहरे मकसद से यह किया।

धर्म प्रचारक के भेष में आंतकी?

सेना ने पिछले दिनों पुलवामा जिले में रऊफ नामक आतंकवादी को पकड़ा था। उसने पूछताछ करने वाले अधिकारियों को बताया कि आतंकियों ने एक मस्जिद में शरण ले रखी थी और जब भी सुरक्षा बल आते तो वे धर्म प्रचारक बन जाते थे।

पुलवामा जिले के चेवा कलां में मुठभेड़ में मारे गये जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों ने एक मस्जिद में पनाह ले रखी थी। इनमें से एक पाकिस्तानी नागरिक था। इस मदरसे को मौलवी नसीर अहमद मलिक ने 2020 में शुरू किया था। मलिक इससे पहले छह-सात साल तक जामिया मस्जिद में इमाम रहा। वह गांव में 4 से 10 साल तक के बच्चों को धार्मिक उपदेश देता था।

मलिक 2016 से पुलवामा, बडगाम, श्रीनगर, कुलगाम और अनंतनाग जिलों के अनेक गांवों से ‘जकात’ इकट्ठा करने के काम में शामिल रहा। चेवा कलां में मुठभेड़ वाली जगह से मिले दस्तावेजों से यह शक हकीकत में बदल गया कि वह दान में मिले धन का इस्तेमाल पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों की मदद के लिए करता था। यह भी पता चला कि मदरसे में मारे गये आतंकवादी वहां कम से कम दो महीने से रह रहे थे।

आतंकवादियों द्वारा किशोरों को गुमराह किये जाने से चिंतित सुरक्षा बल विशेष शिविर आयोजित करके उनके माता-पिता को बता रहे हैं कि मदरसों का इस्तेमाल उनके बच्चों को बरगलाने के लिए होने का खतरा है। अधिकारियों ने कश्मीर के लोगों से इन करतूतों के खिलाफ आवाज उठाने और अपने बच्चों को आतंकवाद के कुचक्र में पड़ने से बचाने का अनुरोध किया है।

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