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इमरान की विदाई के बाद पाकिस्तान का भविष्य क्या होगा, भारत को क्यों रहना चाहिए सतर्क?

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी से इमरान खान की विदाई हो चुकी है। इमरान की विदाई के बाद पाकिस्तान के भविष्य को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब तक पाकिस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। हालांकि, इस बार तरीका अलग था। यहां न ही सेना ने सत्ता काबिज की और न ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री को अयोग्य करार दिया। पाकिस्तान की सियासत में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव के जरिए किसी प्रधानमंत्री को पद से हटाया गया।

अविश्वास प्रस्ताव पर ड्रामेबाजी

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शनिवार देर रात नेशनल असेंबली में जमकर ड्रामेबाजी हुई। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने पद से इस्तीफा दे दिया। सत्तापक्ष ने वॉकआउट कर दिया। आखिरकार, मतदान हुए और विपक्ष ने बहुमत साबित किया।

आधी रात के बाद वोटिंग

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार रात 12 बजे से पहले प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रात 12 बजे से ठीक पहले स्पीकर कैसर ने यह कहते हुए इस्तीफा देने की घोषणा कर दी कि, वह विदेशी साजिश का हिस्सा नहीं बन सकते और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद स्पीकरों के पैनल से अयाज सादिक को सदन का संचालन करने के लिए आमंत्रित किया गया।

सादिक ने पीठासीन अधिकारी का पद संभालने के बाद मतदान प्रक्रिया शुरू की। रात 11.58 बजे मतदान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पीटीआई के सदस्य सदन छोड़कर चले गए। हालांकि इसके बाद फिर दो मिनट के लिए सदन स्थगित करना पड़ा क्योंकि कानूनन रात 12 बजे के बाद पिछले दिन का सत्र जारी नहीं रह सकता। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सत्ता पक्ष की अनुपस्थिति में प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ।

सुप्रीम कोर्ट से अभी भी निकल सकता है रास्ता?

हालांकि इमरान खान के पास कोर्ट जाने का विकल्प अभी भी खुला है। दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले नेशनल असेंबली के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद स्पीकर पैनल से अयाज सादिक को स्पीकर बनाकर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई और उन्होंने ही मतदान प्रक्रिया शुरू की।

imran khan

स्पीकर का चयन विपक्ष की ओर से ही किया गया था। ऐसे में संवैधानिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं और पीटीआई कोर्ट का रुख कर सकती है। इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से बचने के लिए इमरान खान की पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका भी दायर की गई थी

पाकिस्तान का अगला PM

विपक्ष पहले से ही नवाज शरीफ के भाई और पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ के नाम को आगे करती आई है। उनके नाम पर पूरा विपक्ष एकमत है और बिलावल भुट्टो व मरियम नवाज पीएम पद के लिए उनके नाम की घोषणा भी कर चुकी हैं।

भारत को क्यों सतर्क रहना चाहिए?

पाकिस्तान में बदलती सियासत से भारत को सतर्क होने की जरूरत है। दरअसल, इमरान खान जब सत्ता में आए थे तो उन्होंने भारत से अच्छे रिश्ते बनाने की पेशकश की थी।

हालांकि, बाद में कश्मीर मुद्दे पर इमरान खान ने भी वही पुराना राग अलापा था, लेकिन सत्ता जाते-जाते इमरान खान भारत की तारीफ में कसीदे पढ़ते देखे गए और विदेश नीति की काफी प्रशंसा की। अब तक उनकी सरकार गिर चुकी है और संभावना है कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व में विपक्ष सत्ता में आ सकता है, तो इससे समीकरण बदलेंगे।

अमेरिका, चीन क्या करेंगे?

बदली हुई सियासत पर अमेरिका और चीन भी नजरें लगाए बैठे हैं। दरअसल, इमरान खान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान के रिश्ते चीन से ज्यादा अच्छे हुए हैं और चीन ने यहां पर भारी निवेश भी किया है। उसकी कई परियोजनाएं पाकिस्तान में लंबित हैं। वहीं जब इमरान खान अमेरिका पर साजिश रचने का सीधे तौर पर आरोप लगा चुके हैं। अबअगर नई सरकार अमेरिका की तरफ एक कदम बढ़ाती है, तो चीन निवेश रोक सकता है। वहीं चीन की तरफ जाती है, तो उसे अमेरिका के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है।

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