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भारत ने अमेरिका के बाद रूस की हेकड़ी भी निकाल दी, धमकी के बाद भी UN में वोटिंग से रहा दूर

भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तटस्थता की नीति का जितनी मजबूती और खूबसूरती के साथ वो पालन करता है शायद ही दुनिया का कोई देश इस तरह की नीति का पालन करता हो। अब तक संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के लाख दबाव के बाद भी रूस के खिलाफ वोटिंग से दूर रहे भारत ने अब रूस के दबाव में भी आने से इनकार कर दिया। भारत ने साफ तौर पर दिखा दिया कि वो ना तो अमेरिका के साथ है और ना रूस के। भारत किसी के साथ है तो वो है शांति और सद्भावना।

रूस के दबाव में नहीं आया भारत

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूएन में 11वीं बार हुई वोटिंग में भारत अनुपस्थित रहा, लेकिन इस बार नई दिल्ली ने मॉस्को को बड़ा संदेश भी दे दिया। जी हां, YES वोट का मतलब तो अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन है, पर अनुपस्थित रहने को लेकर भी रूस ने चेतावनी दे रखी थी। रूस ने साफ कहा था कि यस वोट और अनुपस्थित दोनों को वह दोस्ताना रवैया नहीं मानेगा और द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा।

बताया जा रहा है कि रूसी राजनयिक ने भारत के टॉप डिप्लोमेट से संपर्क कर समर्थन में वोट करने के लिए भी कहा था। हालांकि रूस के रेड सिग्नल के बावजूद भारत ने अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना। भारत का संदेश अमेरिका और रूस दोनों को स्पष्ट गया है कि कोई अपनी बात थोपने या मास्टर या चौधरी बनने की कोशिश न करे।

अमेरिकी चौधराहट को भी ठुकराया

आपको बता दें कि इससे पहले यूक्रेन-रूस युद्ध पर जब बार-बार वोटिंग से भारत अनुपस्थित रहने लगा तो अमेरिका ने दबाव बनाने के लिए धमकाने वाला लहजा भी अपनाया लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। इस बार भी भारत ने अमेरिका की नहीं सुनी और दुनिया की शीर्ष मानवाधिकार संस्था से रूस को निलंबित करने के प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाई। जबकि वोटिंग से ठीक पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति के शीर्ष सलाहकार ने धमकी दी थी कि अगर भारत ने रूस के साथ रणनीतिक गठजोड़ किया तो उसे लंबे समय तक भारी खामियाजा भुगतना होगा।

भारत ने प्रस्ताव के तरीके पर उठाए सवाल

भारत भले ही रूस के खिलाफ प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा, पर उसका मानना है कि बूचा नरसंहार या यूक्रेन में मानवाधिकार उल्लंघनों की अंतरराष्ट्रीय जांच से पहले यह प्रस्ताव नहीं आना चाहिए था। दिल्ली का अपना तर्क है कि यह प्रस्ताव UNGA से पहले मानवाधिकार परिषद में आना चाहिए था। यह पश्चिमी देशों को भारत का संकेत भी है कि तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आगे रूस को भी भारत का रुख समझ में आ सकता है।

xi jinping

चीन ने रूस को दिया खुला समर्थन

आपको बता दें कि बूचा शहर में सड़कों पर मिले सैकड़ों शवों की तस्वीरें सामने आने के बाद रूस के खिलाफ वैश्विक समुदाय की नाराजगी तो बढ़ी लेकिन वह कहता रहा है कि इसमें यूक्रेन की चाल है। ऐसे माहौल में बृहस्पतिवार को वोटिंग शुरू हुई तो चीन ने रूस को सस्पेंड करने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया जबकि भारत एक बार फिर वोटिंग से अनुपस्थित रहा।

भारत समेत 58 देश अनुपस्थित

अमेरिका की ओर से लाए गए प्रस्ताव को पारित करने के लिए 193 सदस्यीय महासभा (UNGA) में सपोर्ट में 93 वोट पड़े, जबकि भारत सहित 58 देश अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित रहने वाले सदस्यों के वोट काउंट नहीं होते हैं। ‘मानवाधिकार परिषद में रूस की सदस्यता के निलंबन अधिकार’ शीर्षक वाले प्रस्ताव के खिलाफ 24 मत पड़े। मतदान से अनुपस्थित रहने वाले देशों में बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया, इराक, मलेशिया, मालदीव, नेपाल, पकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं।

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