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कुतुब मीनार में रखी गणेश प्रतिमा पर जारी विवाद ने तूल पकड़ा, मूर्तियों को अपमानित तरीके से रखा

कुतुब मीनार को लेकर ऐसे कई साक्ष्य हैं जिनसे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि कभी इस जगह पर भव्य हिंदू और जैन मंदिर थे जिन्हें तोड़कर कुतुब मीनार और दूसरे निर्णाण कार्य मुस्लिम शासकों द्वारा करवाए गए थे। अब कुतब मीनार में रखी भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। पहले इन मूर्तियों को वहां से हटाकर सम्मानजनक स्थान पर रखने की बात कही गई थी। अब बीजेपी पार्षद ने मांग की है कि मूर्तियों को कुतुब मीनार में ही उचित स्थान पर रखकर वहां पूजा-आरती कराई जाए।

मूर्तियों को अपमानित तरीके से रखा  

बता दें कि ऐतिहासिक कुतुब मीनार में मंदिर होने और देवी-देवताओं की मूर्तियों को अपमानित तरीके से रखने का विवाद दशकों पुराना है। लेकिन अब स्थानीय निगम पार्षद ने दावा किया है कि साल 2000 तक कुतुब मीनार में स्थित प्राचीन मंदिर में लोग पूजा-आरती करने आते थे जिसे बाद में किन्हीं वजहों से बंद कर कर दिया गया।

महरौली से बीजेपी की निगम पार्षद आरती सिंह ने यह दावा किया है कि कुतुब मीनार दरअसल पहले मंदिर ही था। आज भी कुतुब मीनार के अंदर जगह-जगह देवी देवताओं की मूर्तियों के अवशेष देखने को मिलते हैं। आरती का आरोप है कि कुतुब मीनार में स्थित मस्जिद परिसर में भगवान की मूर्तियों को जमीन पर रखकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है।

NMA ने किया था ये दावा

इससे पहले ऐसा ही दावा बुधवार को National Monuments Authority (NMA) ने किया था। NMA की तरफ से Archaeological Survey of India (ASI) को पत्र भी लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि भगवान गणेश की मूर्तियों को कुतुब मिनार में अपमानजनक तरह से रखा गया है और उनको वहां से हटाकर नेशनल म्यूजियम में रखा जाना चाहिए।

मूर्तियों को लेकर क्या है विवाद?

कुतुब मीनार में मेन गेट से दाखिल होते ही कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद का गेट पड़ता है। कुव्वतुल इस्लाम का मतलब होता है इस्लाम की शक्ति। इसके चारों ओर बने दालानों में फना समेत कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। मस्जिद के बाहर लगे शिलापट पर साफ-साफ लिखा गया है कि दालानों के खंभो की निर्माण सामग्री 27 हिंदू और जैन धर्म के लोगों के मंदिरों से ली गई थी।

कुतुब मीनार के बगल में स्थित योगमाया मंदिर के पुजारियों का दावा है कि कुतुब मीनार के अंदर भगवान गणेश की पूजा कई सालों से होती आ रही थी। इनका दावा है कि राजा पृथ्वीराज चौहान द्वारा यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया था। यहां पर पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ होती थी, लेकिन जब भारत में मुगल आए तो इन मंदिरों को तोड़कर इन्हें मस्जिद बना दिया गया। दावा ये भी है कि सन 2000 तक कुतुब मीनार के अंदर भगवान की आरती में वह हिस्सा ले चुके हैं। पारंपरिक पुजारी के परिवार की मांग है कि जिस मंदिर को मुगलों ने तोड़ा था उसे पुनः स्थापित किया जाए और वहां पर पारंपरिक पूजा और आरती शुरू की जाए।

उल्टी रखी गणेश प्रतिमा पर विवाद

आपको बता दें कि बीजेपी नेता तरुण विजय भी कई बार कुतुब मीनार में उल्टी रखी हुई गणेश मूर्ति और पिंजरे में बंद दूसरी गणेश प्रतिमाओं का मसला उठा चुके हैं। तरुण विजय ने कहा था कि मैंने खुद कई बार जाकर कुतुब मीनार पर जाकर इस चीज को देखा है। मूर्तियों को बेहद अपमानजनक तरीके से रखा गया है।

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