समाचार

अमेरिकी दादागिरी का धांसू जवाब! ऐसी जगह ऐसा पोस्टर चिपकाया कि बाइडेन तक पहुंच गया भारत का मैसेज

एक दिन पहले ही भारत दौरे पर आए अमेरिकी उप रक्षा सलाहकार ने भारत को चेतावनी दी थी कि रूस-यूक्रेन जंग में उसकी तटस्थता उसके लिए भारी पड़ सकती है, साथ ही उन्होंने कहा था कि जब कभी चीन एलएसी पार करेगा तब भारत का साथ देने के लिए रूस नहीं आएगा। अमेरिका की इस दादागिरी वाले संदेश का किसी ने ऐसा जवाब दे दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति तक तुरंत भारतीयों का मैसेज पहुंच गया होगा। क्या है पूरा मामला आपको आगे बताते हैं।

यूक्रेन और रूस के बीच लगातार जंग जारी है। इस जंग को शुरू हुए एक माह से अधिक हो चुके हैं। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के बाद से ही अमेरिका सहित कई देशों  ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत उन देशों में शामिल है जो इस समय तटस्थ है। भारत ने दोनों ही देशों से कहा है कि वह बातचीत के माध्यम से ही इस समस्या का हल निकाले। भारत का तटस्थ होना शायद अमेरिका को रास नहीं आ रहा है। वहीं भारत दौरे पर आए रूसी विदेश मंत्री ने भारत को लेकर दावा किया है कि भारत यूक्रेन और रूस के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।

joe biden

यूएस दूतावास के बाहर चिपकाया पोस्टर

लेकिन इसी बीच दिल्ली में कुछ अज्ञात और अराजक तत्वों ने अमेरिकी दूतावास के बाहर अमेरिका के विरोध में पोस्टर चिपकाया। पोस्टर में लिखा था कि अमेरिका भारत को धमकी देना बंद करे। इसके साथ ही पोस्टर में कहा गया है कि भारत को अमेरिका की जरूरत नहीं है। बल्कि अमेरिका को ही चीन के खिलाफ भारत की आवश्कता है।

पुलिस ने दर्ज किया केस

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को रात करीब 10 बजे के बाद उनको सूचना मिली थी कि कुछ अज्ञात लोगों ने अमेरिकी दूतावास के बाहर कुछ पोस्टर लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब दोषियों को पकड़ने के लिए सर्विलांस की मदद ले रही है।

modi putin and biden

बता दें इस घटना के एक दिन पहले ही अमेरिका के डिप्टी एनएसए दलीप सिंह ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में रूस को लेकर भारत के रवैये पर चेतावनी दी थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा थी कि रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले देशों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

हालांकि अमेरिकी डिप्टी एनएसए का बयान आने के बाद यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे सैयद अकबरूद्दीन की आलोचना करते हुए तुरंत ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा कि ये कूटनीत की भाषा नहीं है, यह जबरदस्ती की भाषा है,कोई इन्हें बताए की एकतरफा दंडात्मक प्रतिबंध अंतराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

Back to top button