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भारत के गेंहू की कीमत बढ़ी, रूस दे रहा सस्ता तेल, जानिए जंग ने कैसे चोखा कर दिया रंग

रूस-यूक्रेन जंग ने युद्ध की विभिषिका को तो सामने ला ही दिया है साथ ही इस बात को भी उजागर कर दिया है कि कैसे मुसीबत के वक्त खाद्यान्न की कीमत बढ़ती है और विलासिता की चीजें दूसरे नंबर पर चली जाती हैं। रूस-यूक्रेन जंग जैसे-जैसे लंबी खिंच रही है वैसे-वैसे खाद्यान्न की कीमत बढ़ रही है और तेल उत्पादक देश रूस अपने तेल भंडार को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो रहा है।

इसका फायदा भारत जैसे देश को तत्काल मिल रहा क्योंकि भारत के गेंहू की मांग बढ़ गई और रूस उसे सस्ता तेल बेचने का ऑफर दे रहा है। इस तरह भारत डबल फायदे में दिख रहा है। यानि हींग लगे ना फिटकरी रंग चोखा वाला हाल हो गया है।

मिस्र ने गेंहू के लिए भारत से संपर्क किया

यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग में भारत को बड़ा फायदा होता दिख रहा है। भारत में गेहूं की कीमतें एमएसपी से ज्यादा हो गई हैं। मिस्र जैसे देश ने गेहूं के आयात के लिए भारत से संपर्क किया है। गेहूं का एमएसपी 2,050 रुपये ही है, जबकि बाजार में दाम बढ़कर 2,250 से लेकर 2,300 रुपये तक हो गया है। इसके अलावा भारत को रूस से सस्ता कच्चे तेल भी मिलने जा रहा है।

रूस तेल पर भारत को दे रहा डिस्काउंट

उधर रूस ने भारत को इस साल 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल देने का फैसला लिया है। इसके अलावा इस पर 35 डॉलर प्रति बैरल तक का डिस्काउंट भी दिए जाने की तैयारी है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि रूस ज्यादा से ज्यादा तेल भारत को बेचने चाहता है क्योंकि पश्चिमी देशों की ओर से लगी पाबंदियों के चलते वह मुश्किल के दौर में है।

एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत उन देशों में से एक है, जिसने अंतरराष्ट्रीय दबावों और पाबंदियों के बीच भी रूस से तेल की खरीद को बढ़ाने का फैसला लिया है। दरअसल अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस से तेल के आयात में कमी करने का फैसला लिया है। ऐसे में रूस एशिया में ही तेल के खरीददारों की तलाश करने में जुटा है। खासतौर पर चीन और भारत से रूस को बड़ी उम्मीद है। दोनों ही देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई मंचों पर रूस का विरोध नहीं किया है और उसके खिलाफ लाए गए प्रस्तावों से ही दूरी बना ली।

भारत की विदेशी मुद्रा बचेगी

रूस ने भारत को तेल की खरीद में रुपये-रूबल पेमेंट सिस्टम को भी अपनाने की सुविधा देने की बात कही है। यह स्थिति भारत के लिए और अच्छी होगी और उसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार से खर्च नहीं करना होगा। रूस के विदेश मंत्री सेरजे लावरोव गुरुवार को दो दिन के भारत दौरे पर आए हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान इस मसले पर मुहर लग जाएगी। रूस से तेल की खरीद की प्रक्रिया भारतीय कंपनी इंडियन ऑइल के जरिए होगी। अभी यह जानकारी नहीं है कि अधिकतम कितने तेल की खरीद भारत करेगा, लेकिन कम से कम 15 मिलियन बैरल का आयात करने पर सहमति बन सकती है।

भारतीय तेल कंपनियों की बल्ले-बल्ले

गौरतलब है कि रूस से तेल खरीदने की खबरों ने तेल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी ला दी है। इंडियन ऑइल के शेयरों में शुक्रवार सुबह 11 बजे तक 2.3 फीसदी तक का इजाफा देखने को मिला। इसके अलावा हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के शेयरों में भी 2.4% का इजाफा हुआ है।

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