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महिला को अपने पूर्व पति को हर महीने देना होगा 3000 रु का गुजारा भत्ता: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया है। पति-पत्नी के तलाक के बाद पति को गुजारा भत्ता देने के मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि महिला अपने पूर्व पति को हर महीने गुजारा भत्ते दे। हमारे सामाने अधिकतर ऐसे तलाक के मामले सामने आते रहते हैं जहां पति को अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देना पड़ता है। लेकिन ये एक ऐसा मामला है जिसमें एक महिला को अपने पूर्व पति को हर महीने गुजारा भत्ता देना पड़ेगा।

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हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा

दरअसल, औरंगाबाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने नांदेड़ की एक निचली अदालत के उस आदेशों को बरकरार रखा है, जिसमें एक महिला को अपने पूर्व पति को हर महीने 3,000 रुपये गुजरा भत्ता देने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही जिस स्कूल में महिला पढ़ाती है उस स्कूल को भी महिला की सैलरी से हर महीने 5 हजार रुपये काटने और उसे अदालत में जमा करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिला के पूर्व पति की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस दौरान कोर्ट ने महिला की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि उसका तलाक काफी समय पहले ही उसके पति से हो चुका था

इस महिला को वर्ष 2017 में नांदेड़ में सेकंड जॉइंट सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने उसके पूर्व पति को गुजारा भत्ता देने की बात कही थी परंतु महिला ने ऐसा नहीं किया।

हाईकोर्ट पहुंची थी महिला

निचली कोर्ट के आदेश के बाद महिला ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच में अपील की थी। महिला ने इस मामले में जानकारी दी कि उसकी शादी वर्ष 1992 में हुई थी। वर्ष 2015 में महिला और उसके पूर्व पति के साथ उसका तलाक हुआ था। महिला ने बताया कि कोर्ट ने उसके तलाक को मंजूर कर लिया था। इसपर कोर्ट ने पति की तरफ से हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 25 का हवाला दिया और कहा कि पति की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया जा सकता है। ये उनके बीच तलाक से प्रभावित नहीं होता है।

हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24 और 25 के तहत अगर पति या पत्नी में से किसी एक की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और दूसरे की स्थिति ठीक है तो पहला पक्ष गुजारे भत्ते की मांग कर सकता है।

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