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गांव जहां सास-ससुर की सेवा पर बहुओं को मिलता है इनाम: घर में झगड़े बंद, सेवा करने की मची होड़

गांव का सरपंच अगर काबिल हो तो वो ना केवल अपने गांव को खुशहाली के रास्ते पर ले जाता है. बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन जाता है। ऐसे ही एक गांव के सरपंच के दिमाग में घर में होने वाली सास-बहुओं के झगड़ों को हल खोजने का आइडिया आया। उन्होंने गांव की उन बहुओं का पुरस्कृत करने का फैसला लिया जो अपने सास-बहू की सबसे अच्छी तरह सेवा करती हैं। इस फैसले के बाद अब गांव के घऱो में झगड़े बंद हो गए हैं। और अब देवरानी-जेठानी में सास-ससुर की अच्छी तरह सेवा करने की होड़ मची हुई है।

ऐसे होता है सबसे अच्छी बहू का चयन

मध्य प्रदेश के सीधी जिला अंतर्गत ग्राम पंचायत पनवार चौहानन में ग्रामीणों ने अनूठी पहल की है। यहां सास और ससुर की निष्ठापूर्वक सेवा करने वाली बहू को ग्रामीण पुरस्कृत करते हैं। ग्राम सभा की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया है कि ऐसी बहुओं को सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने सास-ससुर की जी-जान से सेवा की है। इसके लिए एक निगरानी समिति बनाई गई है, जो छानबीन कर ऐसी बहुओं को चयनित करती है।

गांव की एक अच्छी बहू से मिली प्रेरणा

ग्राम पंचायत में पिछले दिनों पहला पुरस्कार गांव की बहू राजकुमारी यादव (35) को दिया गया। राजकुमारी के पति राज बहादुर यादव काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। दिसंबर 2021 में ससुर शिवनाथ यादव (67) को हार्ट अटैक हुआ तो राजकुमारी ने घर में पहले खुद पंपिंग कर प्राथमिक उपचार किया। ससुर को अस्पताल ले जाने के लिए किसी का साथ नहीं मिला फिर भी हिम्मत नहीं हारी। उन्हें अकेले ही लेकर जबलपुर के एक निजी चिकित्सालय में पहुंची।

आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने को लेकर जद्दोजहद भी करनी पड़ी। आखिरकार ससुर का इलाज पूरा कराकर वह घर ले लाईं। अब शिवनाथ पूरी तरह से स्वस्थ हैं। राजकुमारी की दिनचर्या सुबह सास और ससुर के आशीर्वाद से शुरू होती है। इसके बाद वह उनके लिए चाय व नाश्ता और खाने का इंतजाम करती हैं। अब राजकुमारी गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।

सरपंच की पहल रंग लाई

सरपंच वीरेंद्र सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत की आबादी करीब 32 सौ है। गांव में अक्सर सास व ससुर और बहू की लड़ाई घर के बाहर तक पहुंच जाती थी। इस लड़ाई में भाई और भाई के आपसी संबंध खराब हो जाते थे और परिवार टूट रहे थे। अब करीब दो महीने से घरों में इस तरह के लड़ाई और झगड़े नहीं हो रहे हैं। महिलाओं में होड़ मची है कि अबकी बार पुरस्कार उन्हें मिले। ऐसे में सभी बहुएं अपने सास और ससुर का ख्याल रख रही हैं। यह पुरस्कार सरपंच खुद देते हैं।

कलेक्टर ने भी की सराहना

सीधी जिले के कलेक्टर मुजीबुर्रहमान ने इस पहल की काफी सराहना की है। उन्होंने कहा सभी लोगों को बजुर्गों का मान व सम्मान और सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पनवार चौहानन टोला में जो पहल शुरू की गई है, वह सराहनीय है। अन्य पंचायतों को भी इसका अनुसरण करना चाहिए।

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