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सपा की जीत पर लगाया था शर्त हारने पर देनी पड़ी बाइक, अखिलेश ने कहा दुबारा ऐसी शर्त मत लगाना

यूपी विधानसभा चुनाव में सपा की हार से इस पार्टी के कई समर्थकों के चेहरे मुरझा गए हैं। लेकिन एक सपा समर्थक का चेहरा अब खिल गया है। इस सपा समर्थक ने अपने दोस्त जो बीजेपी का समर्थक है, से एक शर्त लगाई थी। उसने मतगणना से पहले दोस्त से शर्त लगायी थी कि अगर सपा हारती है तो वह अपनी बाइक उसे दे देगा और अगर सपा जीतती है तो भाजपा समर्थक उसका दोस्त अपनी ऑटो सपा समर्थक दोस्त को दे देगा। दोनों ने यह शर्त बाकायदा 100 रुपये के स्टांप पेपर पर लिखित में लगाई थी।

शर्त हारने पर देनी पड़ी बाइक

सपा समर्थक जब अपनी शर्त हार गया तो उसको अपनी बाईक भाजपा समर्थक को देनी पड़ी, यह शर्त पूरे जिले में आग की तरह फैल गई और सुर्खियों में छा गई। जिसको लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शर्त हारे युवक को अपने पास मिलने के लिये बुलाया और हारी हुई बाईक के एवज में 1 लाख 10 हजार रुपये की चेक उसे दिया। साथ ही यह भी कहा था कि दोबारा ऐसी शर्त मत लगाना। आज युवक ने नई पल्सर गाड़ी खरीद ली है और काफी खुश नजर आ रहा है।

आपको बता दें कि यह पूरा मामला बांदा जनपद के मटौंध थाना क्षेत्र के बसहरी गांव का है, जहां के दो युवक अवधेश कुशवाहा और बृजकिशोर ऊर्फ बिलौटा अच्छे दोस्त हैं, परंतु दोनों अलग-अलग पार्टी के समर्थक है। अवधेश कुशवाहा सपा समर्थक हैं तो बृजकिशोर ऊर्फ बिलौटा भाजपा समर्थक दोनों के बीच मतगणना के पहले जीतने और हारने की शर्त लग गई। शर्त केवल बातों की नहीं थी, शर्त थी कि जो शर्त हारेगा वह अपनी बाईक अथवा ऑटो जीतने वाले को देगा। दोनों ने यह शर्त बकायदा 100/- रुपये के स्टांप पेपर पर लिखित में लगाई।

अखिलेश ने दिलाई नई बाइक

मतगणना के बाद सपा समर्थक अपनी शर्त भाजपा समर्थक से हार गया और शर्त के मुताबिक सपा समर्थक को अपनी बाईक भाजपा समर्थक को देनी पड़ी। यह खबर मिलने पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जब पता चली तो उन्होंने अवधेश को मिलने के लिए लखनऊ बुलाया था और उसे 1 लाख 10 हजार रुपये की चेक दिया।


अखिलेश यादव से हुई इस मुलाकात को लेकर ही अवधेश काफी खुश था और अब नई पल्सर बाइक खरीदने के बाद उसकी खुशी में चार चांद लग गए हैं। इस शर्त से दोनों दोस्तों को फायदा हुआ है। एक दोस्त को मुफ्त में बाइक मिल गई तो दूसरे दोस्त को पुरानी बाइक की जगह चमचमाती नई बाइक मिल गई है। ऐसा कभी-कभी ही देखने को मिलता है जब नेताओं की राजनीति में आम आदमी सीधा फायदा मिल जाय।

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