समाचार

ड्राइवर-कंडेक्टर को सेल्यूट: बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल ले गए बस, कमाई इलाज में लगा दी

आज के भौतिकवादी युग में सब को अपने सुख की ज्यादा चिंता रहती है, लेकिन इसी युग में इंसानियत का झंडा ऊंचा करने वाले भी हैं जो इंसानियत को बचाने के लिए एड़ी-चोटी एक कर देते हैं। मुंबई में भी 2 ऐसे लोगो ने एक अनजान बच्चे को बचाने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी।

दरअसल, एक 5 साल का बच्चा अपनी मां के साथ BEST की बस में सफर कर रहा था। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। ऐसे में कंडक्टर और ड्राइवर ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने बस खाली करवाई और फिर उसे मोड़कर सीधा पास के अस्पताल ले गए, ताकि मासूम को सही समय पर उपचार मिल सके। जब तानवी गावणकर नाम की महिला ने फेसबुक पर इस घटना को साझा किया, तो लोगों ने कहा कि उन्हें यकीन है कि इंसानियत जिंदा है!

बेबस मां के लिए आगे आए ड्राइवर-कंडक्टर

वह अपनी पोस्ट में लिखती हैं- आमतौर पर मैं अपने अनुभवों पर कोई पोस्ट नहीं लिखती। लेकिन इस बार मैं खुद को ये साझा करने से नहीं रोक पाई। यह घटना कल मुंबई में शिवाजी पार्क के ठाकुर अस्पताल में हुई।

जब मैं दोपहर करीब 1.30 बजे अस्पताल से निकलने वाली थी, तो मैंने देखा कि एक टिकट कलेक्टर, बस कंडक्टर और 2 से 3 लोग अस्पताल में भाग रहे हैं। टिकट कलेक्टर एक छोटे से बच्चे (5 वर्ष) को गोद में उठाए था, और एक बेबस मां रो रही थी।

ड्राइवर-कंडक्टर को देख अस्पताल स्टाफ भी दौड़ा

यह देखते ही अस्पताल का स्टाफ बच्चे की मदद के लिए दौड़ पड़ा। नर्स ने तुरंत उसे प्राथमिक उपचार दिया। काउंटर पर बातचीत करने के बाद मुझे समझ आया कि मां के साथ बस में सफर करने के दौरान बच्चे को दौरा पड़ा, और उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। जैसे ड्राइवर को इस बात का पता चला तो उसने बस रोकी और उसे खाली कराया। इसके बाद वो बस को मोड़कर फटाफट बच्चे को नजदीकी अस्पताल में ले गया।

भर्ती कराने के लिए दी दिनभर की कमाई

टिकट कलेक्टर और बस कंडक्टर ने सुबह से जो भी पैसा कमाया था सब बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए दे दिया। वो भी एक ऐसे परिवार के लिए जिसे वो जानते तक नहीं थे! शायद ये ऐसा मामला नहीं था कि जिसमें बच्चे को भर्ती और उसका इलाज करने से पहले अस्पताल ने उनसे फीस मांगी हो, लेकिन इलाज में किसी तरह की देरी से बचने के लिए उन्होंने खुद ही यह फैसला लिया।

ड्राइवर-कंडक्टर को सम्मानित किया गया

बेस्ट जनरल मैनेजर लोकेश चंद्र ने ड्राइवर और कंडक्टर को उनकी त्वरित कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया। अब लोग बस नंबर 33 के टिकट कलेक्टर, कंडक्टर और ड्राइवर का दिल से शुक्रिया अदा कर रहे हैं।

Back to top button