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एक गांव जहां सिर्फ महिलाएं खेलती हैं होली, पुरुष नहीं लगा सकते किसी को रंग, लगाया तो जुर्माना

होली भारत का एक मशहूर त्योहार है। उत्तर भारत में होने वाली होली की हुडदंग की चर्चा तो पूरी दुनिया में होती है। होली को लेकर अलग-अलग परंपराएं भी हैं। कहीं 3 दिन होली खेली जाती है तो कहीं 7 दिन, कहीं लट्ठमार होली होती है तो कहीं लड्डूमार। लेकिन एक ऐसा भी गांव है जहां होली सिर्फ महिलाएं खेल सकती हैं, पुरुषों को होली खेलने की इजाजत नहीं है, और अगर कोई पुरुष होली खेलता दिख गया तो उसे तगड़ा जुर्माना देना पड़ता है।

पुरुषों के होली खेलने पर रोक

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुंडौरा गांव में महिलाओं द्वारा अनोखे तरीके से होली खेलने की परंपरा विख्यात है। इसमें पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। महिलाएं पुरुषों को गांव से बाहर कर खुद होली में धमाल करती हैं। होली के एक दिन बाद खेली जाने वाली इस होली में पुरुषों को पूरे दिन घर में रहना होता है, जबकि महिलाएं रामजानकी मंदिर से होली की फाग निकालकर गलियों में हुड़दंग करती हैं।

बुंदेलखंड का यह अकेला गांव हैं जहां होली इस अंदाज में मनाई जाती है। यह परंपरा कई वर्षों पुरानी है। इस बार भी महिलाएं यह अनूठी परंपरा निभाने को तैयार हैं। महिलाओं की होली की फोटो लेने पर भी प्रतिबंध है। अगर किसी पुरुष ने महिलाओं की फाग तस्वीर ली या वीडियो बनाया तो उस पर तगड़ा जुर्माना लगाया जाता है। कभी-कभी तो पिटाई भी हो जाती है

500 वर्ष पुरानी है ये परंपरा

कुंडौरा गांव में यह परंपरा 500 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। जब गांव में महिलाओं की फाग निकलती है, तब कोई भी पुरुष उन्हें देख नहीं सकता। पुरुषों को या तो घर में कैद रहना पड़ता है, या फिर उन्हें खेतों की ओर जाने को कहा जाता है।

गांव की पूर्व प्रधान उपदेश कुमारी कहती हैं कि जब से वे बाबुल का घर छोड़कर पिया के घर आईं, तभी से इस होली की परंपरा का हिस्सा बनी रहीं। यह परंपरा पूर्वजों ने शुरू की थी, जिसको आज भी बड़े शिद्दत के साथ निभाया जा रहा है।

महिलाओं की टोली निकलती है

गांव की सरपंच सरिता देवी कहती हैं कि होली त्योहार के दिन गाजे और बाजे के साथ गांव की महिलाओं की फाग निकलती है। जगह-जगह पर नाच गाना होता है। खास बात है कि हर घर से महिलाएं ही इसमें शामिल होती हैं और ढोल-मजीरा बजाते हुए ठुमके लगाती हैं। सभी महिलाएं एक दूसरे को गुलाल से रंग लगाकर होली की बधाई देती हैं। यह आयोजन शाम तक चलता है। महिलाओं के इस आयोजन में कुंडौरा गांव के साथ ही दरियापुर गांव की महिलाएं भी शामिल होती हैं।

जिस समय महिलाओं की फाग गांव में घूमती है, उस समय पुरुष या तो वहां से हटकर घरों में कैद हो जाते हैं या खेत की तरफ निकल जाते हैं। वापस तभी आते हैं जब फाग पूरी हो जाती है। होली की फाग का शुभारंभ गांव के ऐतिहासिक रामजानकी मंदिर से होता है। खेरापति बाबा के मंदिर परिसर में इस अनूठी परंपरा का समापन होता है।

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