राजनीति

‘कांग्रेस ने देश आजाद कराया था, कांग्रेस ही देश आजाद कराएगी’: करारी हार के बाद कांग्रेस का दावा

पांच राज्यों के चुनाव में मिली करारी हार के बाद देश में उसके सियासी हालात ऐसे हैं कि उसका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा अब खतरे में दिखने लगा है। दिल्ली के बाद पंजाब में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी खुद को कांग्रेस का विकल्प बताने लगी है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी की तरफ से ऐसे-ऐसे संदेश ट्वीट किए जा रहे हैं जिनका सिर-पैर समझना आम लोगों के बस की बात नहीं हैं।

 कांग्रेस पार्टी का ट्वीट

कांग्रेस के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से आज ट्वीट किया गया- ‘कांग्रेस ने देश आज़ाद कराया था, कांग्रेस ही देश आजाद करायेगी।’ इस ट्वीट के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि कांग्रेस को लगातार चुनाव हारने और लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस आखिर क्‍या संदेश देना चाहती है?

सवाल है कि ‘कांग्रेस ने देश आज़ाद कराया था’ ये बात उसे बार-बार लोगों को क्यों बतानी पड़ रही है। दरअसल, ऐसा कर कांग्रेस जनता के बीच अपना पुराना गौरव और इतिहास बताने की कोशिश कर रही है कि ताकि उस पार्टी के एहसान को जनता को याद दिलाते रहा जाय।

दूसरा सवाल ये है कि कांग्रेस किस आजादी की बात कर रही है? क्या केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं बनना देश की गुलामी है, जनता लोकतंत्र के जरिए किसी अन्य पार्टी को सत्ता पर बिठाए तो क्या ये गुलामी है? क्या सत्ता पर कांग्रेस का काबिज होना ही आजादी है? वास्तव में कांग्रेस का ये ट्वीट उसकी हताशा और निराशा को ज्यादा दिखाता है।

rahul gandhi priyanka gandhi

हताश-निराश कांग्रेस

पांच राज्‍यों के चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के हाथ खाली ही रहे हैं। चुनाव में उसके निराशाजनक प्रदेश का दौर जारी है। वह न पंजाब में अपनी सरकार बचा पाई न उत्‍तर प्रदेश में ही कुछ कमाल दिखा पाई। बंगाल में निराशा हाथ लगने के बाद कांग्रेस ने उत्‍तर प्रदेश में नए तरीके से नई रणनीति के साथ शुरुआत की थी, लेकिन यहां उसे एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस को यहां 10 सीटें भी हाथ नहीं लगीं। 403 सीटों वाली विधानसभा में 2 सीट मिलना देश आजाद कराने वाली पार्टी के लिए जमानत जब्‍त होने जैसा ही है।

राहुल के बाद प्रियंका भी फेल साबित

कांग्रेस पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा था कि कांग्रेस इस बार के विधान सभा चुनाव में कुछ कमाल कर देगी। पूरा चुनाव प्रियंका गांधी के नेतृत्‍व में लड़ा जा रहा था। रैली हो, रोड शो हो, चुनाव प्रचार हो या घर-घर जाकर लोगों से मिलना हो ये सब प्रियंका गांधी की रणनीति का ही हिस्‍सा था। जिसमें राहुल गांधी कहीं दिखाई भी नहीं दिए। राहुल के बाद पार्टी की ओर से इस बार का दांव प्रियंका के ऊपर खेला गया था। बावजूद हालत जमानत जब्‍त कराने वाली बन गई

क्या ये कांग्रेस के परिवारवाद का अंत है?

कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी के फेल साबित होने के बाद कांग्रेस पार्टी की आखिरी बची उम्‍मीद प्रियंका गांधी थीं। जिन पर दाव खेलकर पार्टी उम्‍मीद कर रही थी वो मोदी की आंधी में खुद को बचा पाएं लेकिन ऐसा हुआ कुछ नहीं। राहुल के बाद प्रियंका गांधी के रूप में कांग्रेस की आखिरी उम्‍मीद भी बिखरती नजर आई। जिसका नतीजा है कि कांग्रेस अब लगभग 75 साल पहले दिलाई आजादी का एहसान याद दिलाती नजर आ रही है। इस चुनाव नतीजे से तो यही लग रहा है कि कांग्रेस के परिवारवाद का अब अंत नजदीक है। आगे आपको बताएंगे कि आखिर किसे है आजादी की जरूरत।


किसे है आजादी की जरूरत?

आगे अगर कांग्रेस को अपना अस्तित्व बचाना है तो उसे लोकतंत्रात्मक तरीके से पार्टी चलानी होगी और पार्टी के हर स्तर पर ऐसे लोगों को नेतृत्व देना होगा जो काबिल हैं और पार्टी के साथ-साथ देश को भी आगे ले जा सकते हैं। कांग्रेस में ऐसे नेताओं की कमी नहीं है लेकिन इसके लिए जरूरत इस बात की है कांग्रेस खुद को परिवार की सियासत के बंधन से खुद को आजाद कराए।

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