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योगी के दोबारा CM बनते ही नोएडा से मिटा ‘अपशकुन’ का दाग, विदेश में पढ़े अखिलेश ने नहीं रखा था कदम

यूपी में बीजेपी की शानदार जीत के बाद योगी आदित्यनाथ के दोबारा सीएम बन जाएंगे। ये जीत बीजेपी के लिए तो कई मायने में मील का पत्थर साबित हुई है। लेकिन बीजेपी और योगी आदित्यनाथ की जीत ने नोएडा शहर और गौतमबुद्ध नगर जिले पर लगा अपशकुन का कंलक भी धो डाला है।

1988 से इस शहर और जिले पर ऐसा कलंक लग गया था कि जो कोई भी मुख्यमंत्री इस जिले का दौरा करता है उसकी कुर्सी चली जाती है। इस अपशकुन की वजह से विदेश में इंजीनियरिंग की उच्च डिग्री लेने वाले अखिलेश यादव ने भी सीएम बनने के बाद कभी नोएडा की तरफ झांका तक नहीं।

बीजेपी पर दकियानूसी का अक्सर आरोप लगाने वाले खुद कितने अंधविश्वासी हैं, ये इस बात को साफ-साफ दिखाता है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार 5 साल तक इस बात को दोहराते रहे कि नोएडा अपशकुनी है। इसको लेकर उन्होंने कई बार सीएम योगी आदित्यनाथ पर तंज पर कसा था, लेकिन अब उनकी बोलती बंद हो गई है।

10 साल तक नोएडा नहीं आए

सपा मुखिया अखिलेश यादव नोएडा को अपशकुनी मानते हैं और वह वर्ष 2012 में सीएम पद पर बैठने के बाद लगातार 10 साल तक नोएडा नहीं आए,। हालांकि, मिथक (अपशकुनी) यह है कि जो वर्तमान मुख्यमंत्री नोएडा आता है, उसकी सीएम की कुर्सी चली जाती है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस अपशकुन में विश्वास करते हैं, इसके कई बार आलोचना भी हो चुकी है।

पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक अखिलेश यादव की आलोचना भी कर चुके हैं। सीएम योगी ने कहा था अखिलेश यादव को नोएडा, गौतमबुद्ध नगर या उत्तर प्रदेश की नहीं सिर्फ अपनी कुर्सी की चिंता है।

1988 में अपशकुनबना नोएडा

1988 में नोएडा आने के बाद मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह चुनाव हार गए। इसके बाद नरायण दत्त तिवारी, कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव की कुर्सी भी नोएडा आने के बाद चली गई।

इसके बाद नोएडा अशकुनी बन गया। वर्ष 2007 में मुख्यंमत्री बनने के बाद मायावती ने अपशकुनी को तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने पांच साल के कार्यकाल में नोएडा का तीन बार दौरा किया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री रहने के दौरान ही मायावती ने दिसंबर 2011 में दलित प्रेरणा स्थल का उद्घाटन तक किया, लेकिन 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा चुनाव हार गई।

इससे भी पहले 1999 में मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान कल्याण सिंह नोएडा आए थे, फिर उनकी भी कुर्सी चली गई। इससे भी पहले 1997 में मायावती नोएडा और उनकी सरकार गिर गई। 2007 में मायावती मुख्यमंत्री बनीं तो फिर नोएडा आईं और 2012 में उनकी पार्टी हार गई। इस मामले में अखिलेश यादव एक मात्र यूपी के नेता हैं, जो नोएडा नहीं आए फिर भी उनकी कुर्सी चली गई।

सीएम बनने के 6 माह के अंदर नोएडा आए योगी

वहीं, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के 6 माह के भीतर ही नोएडा आए और उसके बाद तो कई बार नोएडा का दौरा किया। अब तक वह दर्जन भर से अधिक बार नोएडा आ चुके हैं। वहीं, अखिलेश यादव तो नोएडा को लेकर इतना डर गए थे कि वे अपने सीएम आवास से ही नोएडा के विकास कार्यक्रमों का शिलान्यास और लोकार्पण करते रहे। इस चुनाव से ठीक पहले भी सीएम योगी चुनाव प्रचार के लिए नोएडा आए और पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार किया।

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