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मासूम के पिता की मौत, मां की सुनने की शक्ति गई, खुद भी नहीं सुन पा रहा, एक पल में सब बदल गया

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर से दुखद खबर आ रही है। यहां एक पल में परिवार की खुशियां उजड़ गईं। माता-पिता अपने मासूम बेटे को डॉक्टर के पास दिखाकर बाहर निकले ही थे कि एक ऐसा धमाका हुआ कि सबकुछ एक क्षण में बदल गया।

आठ माह के मासूम वरुण ने अभी पिता की अंगुली पकड़ कर चलना भी शुरू नहीं किया था। पिता का वह लाडला था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। एक धमाके ने मासूम के सिर से पिता का साया ही उठा लिया। इतना ही नहीं धमाके की तेज आवाज ने उससे सुनने की क्षमता पर भी असर डाला है। वह और उसकी मां ठीक से सुन भी नहीं पा रहे हैं। इसे लेकर डाक्टर भी कुछ कहने की हालत में नहीं है।

अस्पताल से बाहर निकले ही विस्फोट

जिला अस्पताल में विस्फोट में मारे गए जुगल की पत्नी अनीता और आठ माह के बच्चे वरुण के परिजनों ने बताया कि वरुण दो दिन से बीमार था। उल्टी दस्त रुक नहीं रहे थे। बुधवार सुबह वरुण को लेकर मां अनीता, पिता जुगल और उनके दो भाई राजू राम और कुलदीप ऊधमपुर आए थे। सुबह अस्पताल में जांच के बाद घर लौटने के लिए मेटाडोर का इंतजार कर रहे थे। वह कोर्ट रोड से पार्क के साथ होते हुए धार रोड की तरफ जाने वाली सीढ़ियों के पास खड़े थे।

उसी वक्त जबरदस्त विस्फोट हुआ। जुगल उस तरफ खड़ा था जिस तरफ विस्फोट हुआ। वह चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विस्फोट से वह ऊपर उछल कर नीचे गिरा। दोनों भाइयों और पत्नी को भी चोटें आई। अनीता को सुहाग उजड़ने की खबर अभी नहीं दी गई है।

मासूम की किलकारी हुई बंद

अस्पताल में दादी की गोद में बैठा वरुण अस्पताल में आने जाने वाले लोगों को हैरानी भरी आंखों और मासूमियत से देख रहा है। दादी ने बताया कि जन्म के बाद से वरुण बेहद सक्रिय है, वह इस तरह से शांत कभी नहीं रहता। आवाज लगाने पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा। लगा रहा है वह सुन नहीं पा रहा। धमाके में घायल हुई उसकी मां अनीता भी ठीक से नहीं सुन पा रही है। कई अन्य भी अस्पताल में ऐसे हैं जिनको सुनाई देना बंद हो गया है या सुनाई कम पड़ रहा है

कई लोगों के कान के पर्दे फटे

आपको बता दें कि विस्फोट के समय पास मौजूद कई लोगों के सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। जिला अस्पताल में भर्ती काकू राम से जब हाल पूछा तो उसने हाथों से इशारा कर सुनाई न देने और कान के पर्दे फटने की जानकारी दी। वहीं जिला अस्पताल में भर्ती अन्य कुछ लोगों ने बताया कि धमाके की तेज आवाज से ठीक से सुनाई नहीं दे रहा।

 जिला अस्पताल के मेडिकल सुर्पंरटेंडेंट डा. विजय रैना से पूछने पर उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कान के पर्दे फटने की वजह से सुनने की क्षमता चली गई है। कुछ की प्रभावित हुई है। आठ माह का बच्चे की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। यह अस्थाई है या स्थाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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