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एक कुएं ने बदल दी परिवार की जिंदगी, कर्ज से मिला छुटकारा, परिवार के वरदान बना कुआं

छत्तीसगढ़ के बीजापुर के एक परिवार के लिए कुआं खुदवाना वरदान साबित हुआ। आर्थिक तंगी और कर्ज से जूझ रहे इस परिवार की इस कुएं ने जिंदगी बदल दी। इस परिवार ने इस कुएं की बदौलत ना केवल कर्ज चुकाया बल्कि जब आय बढ़ी तो नया बिजनेस भी शुरू कर दिया। इस परिवार ने ये सब कैसे किया इसकी पूरी डिटेल आपको आगे बताते हैं।

परिवार के वरदान बना कुआं

कुएं ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के धनोरा गांव की महिमा कुड़ियम और उनके परिवार की जिंदगी बदल दी है। इस कुएं की बदौलत अब उनका परिवार तेजी से कर्जमुक्त होने की राह पर हैं।

पहले महिमा कुड़ियम और उसके पति जेम्स कुड़ियम खरीफ मौसम में अपने चार एकड़ खेत में धान उगाकर बमुश्किल गुजर-बसर कर पाते थे। जेम्स कुड़ियम बताते है कि सिंचाई का साधन नहीं होने से केवल बारिश के भरोसे सालाना 15-20 क्विंटल धान की पैदावार होती थी।

 ट्रैक्टर का कर्ज नहीं चुका पा रहा था परिवार

राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कुरियम ने वर्ष 2017 में बैंक से कर्ज लेकर ट्रैक्टर खरीदा था, जिसकी हर छह महीने में 73 हजार रूपए की किस्त अदा करनी पड़ती थी। आय के सीमित साधनों और ट्रैक्टर से भी आसपास लगातार काम नहीं मिलने से वे इसका किस्त समय पर भर नहीं पा रहे थे, जिससे ब्याज बढ़ता जा रहा था। इसने पूरे परिवार को मुश्किल में डाल दिया था।

कुआं खुदवाने का मिला सुझाव

इन्ही परेशानियों के बीच एक दिन महिमा कुड़ियम को धान की सूखती फसल को देखकर ग्राम रोजगार सहायक ने मनरेगा योजना के तहत खेत में कुआं निर्माण का सुझाव दिया। ग्राम रोजगार सहायक की सलाह पर उसने अपनी निजी भूमि में कुआं खुदाई के लिए ग्राम पंचायत को आवेदन दिया।

पंचायत की पहल पर मनरेगा के अंतर्गत उसके खेत में कुआं निर्माण का काम स्वीकृत हो गया और 11 फरवरी 2019 को इसकी खुदाई भी शुरू हो गई। सात फीट की गहराई में ही गीली मिट्टी में पानी नजर आने लगा। चार महीनों के काम के बाद 11 जून 2019 को कुआं बनकर तैयार हो गया। कुएं में लबालब पानी आ गया।

ऐसे बदली तस्वीर

महिमा कुड़ियम बताती है कि उसके कुएं में पर्याप्त पानी है कुएं के पानी का उपयोग वे लोग अपने चार एकड़ खेत में लगे धान की सिंचाई के लिए करते है। इससे धान की पैदावार अब बढ़कर लगभग 50 क्विंटल हो गई है। इसमें से वे कुछ खुद के उपभोग के लिए रखकर शेष पैदावार को बेच देते हैं।

नया बिजनेस भी शुरू किया

धान की उपज बढ़ने के बाद भी ट्रैक्टर का किस्त पटाने की समस्या बरकरार थी। ऐसे में उन्होंने कुएं के साथ लगी अपनी एक एकड़ खाली जमीन पर कुएं के पानी का उपयोग कर ईट बनाने का काम शुरू किया। पिछले तीन सालों से वे लाल ईंट का कारोबार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उसके परिवार के द्वारा बनाए गए ईटों की काफी मांग है। ईट की बिक्री से उन्हें वर्ष 2019 में 50 हजार रुपए, 2020 में एक लाख रुपए और 2021 में डेढ़ लाख रुपए की कमाई हुई है। अब कर्जा तेजी चुकता हो रहा है परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी हो गई है।

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