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‘द कश्मीर फाइल्स’: घाटी का सच देख दहल गए अमेरिकी, टाइम्स स्क्वॉयर पर लगा दिया फिल्म का बैनर

80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत का दौर कश्मीर के इतिहास का एक बड़ा काला धब्बा है। इस दौर में कश्मीर पर नजर लगाए पाकिस्तान के बहकावे में आकर कश्मीरी मुसलमानों ने अपने साथ सदियों से रह रहे हिंदू समुदायों खासकर पंडित समुदाय पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया।

अत्याचार इतना बढ़ा कि लोग पलायन करने लगे। घाटी को पंडितों से बिल्कुल खाली कराने के लिए अलगावादियों ने अत्याचार करना शुरू कर दिया। कट्टरवाद में अंधे अलगाववादियों ने महिलाओं के साथ बलात्कार किया, मासूम बच्चों को असमय मौत के मुंह में धकेल दिया और पुरुषों की बेरहमी से हत्या कर दी।

इसी नरसंहार और मानव त्रासदी को फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में दर्शाया गया है। फिल्म के मेकर विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है, और पहली बार कश्मीर की असलियत को दुनिया के सामने सबसे अच्छे ढंग से प्रदर्शित करती है।

फिल्म का जम्मू में प्रमोशन

कश्मीर नरसंहार और अपने ही देश में विस्थापित बने कश्मीरी पीड़ितों की सच्ची कहानी पर आधारित एक चौकाने वाली दिलचस्प और क्रूर हकीकत दर्शाती फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की टीम के निर्माता, कलाकार विवेक अग्निहोत्री, दर्शन कुमार, पलवी जोशी, भाषा सुंबली, सौरव वर्मा आदि फिल्म के प्रचार के लिए इन दिनों जम्मू में हैं।

शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में विवेक अग्निहोत्री ने दावा किया कि यह फिल्म ही नहीं यह एक ऐसी कहानी एक ऐसी दास्तां हैं जो स्वतंत्र भारत के इतिहास पर एक कलंक है। जिसके सत्य को कभी किसी ने दर्शाने की कोशिश ही नहीं की।

फिल्म 2018 में बननी शुरू हुई और अब बनकर रिलीज होने को है। उन्होंन  कहा इस पर हुआ रिसर्च वर्क सबसे महत्वपूर्ण है।कश्मीर घाटी के युवा लड़के-लड़कियों के वीडियो इंटरव्यू रिकार्ड कर असली सच के तार में पिरोया गया है।

टाइम्स स्क्वॉयर पर लगाया फिल्म का बैनर

इसे जब रिलीज करने का समय आया तो अमेरिका में फ्री कश्मीर की एक कंपेन चलाई गई थी। तब यह तय किया गया कि फिल्म को अमेरिका में दिखाना जरूरी है। फिल्म को वहां दिखाया गया तो अमेरिकी संसद को बोलना पड़ा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी है।

अमेरिका में कभी कश्मीर का पूरा नक्शा नहीं दिखाया जाता। वहां रहने वाले भारतीय युवाओं ने भी कश्मीर का नक्शा नहीं देखा था। पहली बार फिल्म देखने के बाद भारतीय अमेरिकियों ने पैसे जमा कर टाइम्स स्कवेयर पर 26-27 जनवरी को पूरे नक्शे के साथ ‘द कश्मीर फाइल्स का बैनर’ लगा दिया।

फिल्म देख जम्मू के लोग हुए भावुक

विवेक ने दावा किया कि फिल्म देखने के बाद लोग भावनात्मक तरीके से कश्मीर से जुड़ेंगे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को फिल्म जम्मू में दिखाई गई तो लोग बेहद भावुक हो गए । उनके सामने उस समय की हकीकत सामने थी।

फिल्म का विरोध करने वालों पर ये कहा

फिल्म को लेकर कुछ लोगों के एतराज पर विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि कुछ तबका है, जो नहीं चाहता कि फिल्म दुनिया देखे। कश्मीरी की सच्चाई दुनिया तक पहुंचे। कश्मीर के नाम पर दुकानदारी करने वाले ऐसे लोग हैं। जिन्हें कश्मीर के बारे में कोई जमीनी जानकारी नहीं। वह चैनलों पर बैठकर घंटों चिल्लाते रहते हैं। जो लोग पीआइएल कर रहे हैं।

उन्हें कश्मीर की कोई जानकारी नहीं है। जो कहते हैं कि फिल्म समाज को तोड़ने का काम कर रही है तो यह गलत है। फिर तो यासीन मलिक भी अपने आप को आधुनिक गांधी बताते हैं। वहीं लोग फिल्म को गलत बताने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने कश्मीरी पीड़ित समुदाय के साथ गलत किया है

फिल्म में और भी है बहुत कुछ

पल्लवी जोशी ने फिल्म में अपनी भूमिका को लेकर कहा कि फिल्म देखने के बाद लोगों को लगेगा कि यह काम उनका सबसे चुनौतिपूर्ण कार्य था। उन्होंने कहा कि अभी जम्मू में जिन लोगों ने फिल्म देखी है, और ट्रेलर देखकर दूसरे दर्शक जबरदस्त रिएक्शन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में फैले आतंक और भयानक दहशत के अलावा फिल्म में काफी कुछ है।

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