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रूस-यूक्रेन जंग का परमाणु युद्ध में बदलने का कितना खतरा? दोनों ओर की एटमी धमकियां अब डराने लगी हैं

रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में रूस की तरफ से परमाणु हमले की धमकी नहीं दी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ा और यूक्रेन की तरफ से जमीन पर कड़ी टक्कर मिलने लगी तो पुतिन की तरफ से परमाणु युद्ध की धमकी मिलने लगी। पश्चिमी देशों से यूक्रेन को लगातार मिल रही सहायता और रूस पर चौतरफा प्रतिबंध के बीच पुतिन ने फिर परमाणु बम के विकल्प की धमकी दी। आज रूस के विदेश मंत्री ने यह कह कर सबको चौंका दिया कि अमेरिका रूस पर परमाणु हमले की तैयारी कर रहा है।

ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं कि रूस की तरह अमेरिका ने भी अब अपनी परमाणु युद्ध की प्रक्रिया को तैयार रहने के लिए कह दिया है। इन सब धमकियों के बीच दुनिया में परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ गया है। ऐसा युद्ध जिसमें लाखों लोग मारे जाएंगे, कई दिन उस जगह सूरज नहीं दिखेगा और आने वाली कई पीढ़ियां अपंग पैदा होंगी। ऐसी भयावह स्थिति कैसे बन रही है आपको आगे बताते हैं।

रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग  का अब तक कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। इसके उलट खबरें ऐसी आ रही हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपनी परमाणु-सैन्य बल  को सतर्क कर दिया है। किसी भी परिस्थिति के लिए उसे तैयार रहने का आदेश दिया है।

रूस के पास हैं इतने परमाणु हथियार

पक्का तो किसी को मालूम नहीं, लेकिन अमेरिकी वैज्ञानिकों के महासंघ  का अनुमान है कि रूस के पास करीब 5,977 परमाणु हथियार हैं। यह तादाद दुनिया में सबसे अधिक बताई जाती है। हालांकि इनमें से 1,500 या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर उन्हें तितर-बितर कर दिया गया है. लेकिन बाकी 4,577 हथियारों में 2,500 से अधिक बेहद घातक हैं।

रूस के पास रेडी टू अटैक परमाणु हथियारों में सबसे अधिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (IBM) हैं। ये करीब 1,185 हैं। इनमें से करीब 70% आईबीएम बटन दबाते ही उड़ने के लिए तैयार स्थिति में समुद्री और जमीनी सैन्य अड्‌डों पर तैनात हैं। ये हथियार 10-15 हजार किलोमीटर की दूर तक, एक महाद्वीप से दूसरे में जाकर भी अपना लक्ष्य भेद सकते हैं, तबाही मचा सकते हैं।

पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली मिसाइलें (SLBM) 800 के आसपास हैं, इनमें 75-80% तैनात हैं। बाकी भंडारों में सुरक्षित हैं। हवाई जहाजों से छोड़े जाने वाले परमाणु बम (ALNB) 580 के करीब हैं. इनमें से अधिकांश भंडारों में हैं। करीब 15-20% की तैयार स्थिति में मारक उपकरणों के साथ फिट हैं।

नाटो के पास इतने परमाणु हथियार

रूस के बाद सबसे अधिक 5,943 परमाणु हथियार उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के पास हैं। अमेरिका के नेतृत्व वाला यही सैन्य गठजोड़ यूक्रेन पर रूस के हमले की तात्कालिक वजह बना है। नाटो के अगुवा अमेरिका (USA) के पास 5,428, फ्रांस के पास 290 और ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) बताए जाते हैं।

चीन, भारत, पाकिस्तान के पास इतने हथियार

इसके बाद चीन के पास 350, पाकिस्तान के पास 165, भारत के पास 160, इजरायल के पास 90 और उत्तर कोरिया के पास 20 परमाणु हथियार बताए जाते हैं। यहां, फिर याद रखिए, यह संख्या सिर्फ अनुमानित ही है।

तबाही का ऐसा होगा मंजर

विशेषज्ञ बताते हैं कि 100 किलोटन का एक परमाणु हथियार करीब 8 वर्गकिलोमीटर के दायरे में कम और लंबी अवधि की तबाही लाता है। इसमें से करीब पौने-दो वर्ग किलोमीटर का दायरा तो नेस्तनाबूद ही हो जाता है। इमारतें और तमाम ढांचे ध्वस्त हो जाते हैं। हजारों लोग मारे जाते हैं। दूर-दायरे के जो लोग बच भी गए वे लंबी अवधि में रेडियो-विकिरण के प्रभाव से गूंगे, बहरे, लंगड़े, लूले और बीमार होकर बाकी जिंदगी गुजारते हैं। इतना ही नहीं, इंसान हो या पशु-पक्षी, आने वाले कई सालों तक इनकी संतानें किसी न किसी शारीरिक, मानसिक विकार के साथ पैदा होती हैं।

जापान के हिरोशिमा-नागासाकी को अभी तक कोई भूला नहीं है। अमेरिका ने वहां 15 किलोटन के 2 परमाणु बम गिराए थे। इससे करीब 1.46 लाख लोगों की मौत हुई थी। आने वाली पीढ़ियों तक उसके जो असर सामने आए, वे अलग। इसके लिए अमेरिका को आज भी ‘मानवता के दुश्मन’ की तरह याद किया जाता है।

ऐसे में, परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी या तैयारी को सिर्फ प्रतिद्वंद्वियों को डराने-धमकाने की कोशिश ही माना जा रहा है। कम से कम अभी तो यही कहा जा सकता है। लेकिन साथ ही इसकी गारंटी भी कोई नहीं ले सकता।

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