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यूक्रेन में भारतीय तिरंगे के सहारे जान बचा रहे पाकिस्तानी, भोपाल लौटी 2 बहनों ने सुनाई आपबीती

यूक्रेन में भारत का राष्ट्रीय ध्वज सुरक्षा की गारंटी बन गया है। यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्रों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए ये बात कही। अपना तिरंगा केवल भारतीयों की सुरक्षा ही नहीं कर रहा बल्कि पाकिस्तान समेत कई देशों के छात्र हाथ में भारत का तिरंगा लिए सुरक्षित निकल रहे हैं।

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को वापस भारत लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन गंगा के तहत भोपाल की दो बहनें गुरुवार को अपने घर पहुंची। दोनों बहनें मिली तिवारी और मुस्कान तिवारी साल 2017 में MBBS की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थीं। मिली और मुस्कान ने बताया कि यूक्रेन में अगर कोई इंडिया का तिरंगा झंडा लेकर निकलता है तो कोई इस माहौल में भी कोई कुछ नहीं कहता।

तिरंगा बना सुरक्षा की गारंटी

दोनों बहनों ने बताया कि भारतीय छात्र ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी हाथ में तिरंगा लेकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच रहे हैं। भारत के अलावा पाकिस्तान, तुर्की और नाइजीरिया के कई उनके जानने वाले छात्रों ने तिरंगा हाथ मे लेकर सफर तय किया ताकि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। मिली ने बताया कि उसके विदेशी दोस्तों का कहना है कि उनके हाथों में तिरंगा देखकर हमें सुरक्षित निकलने दिया गया।

आजतक से बात करते हुए दोनों बहनों ने बताया कि उन्होंने अपने शहर से रोमानिया के सुरक्षित बॉर्डर तक पहुंचने के लिए 5 दिनों तक सफर किया और इस दौरान वो दो दिनों तक रिफ्यूजी कैंप में भी रहीं। लेकिन रोमानिया पहुंचने के बाद घर पहुंचने तक केंद्र और राज्य सरकार ने छात्रों का पूरा ध्यान रखा। दोनों बहनों के मुताबिक यूक्रेन से पोलैंड, हंगरी और रोमानिया तक पहुंचने के लिए छात्रों को खुद ही पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। उसके बाद रोमानिया के एयरपोर्ट से दिल्ली एयरपोर्ट तक और फिर उसके आगे घर तक पहुंचने का पूरा खर्चा सरकार ने उठाया है।

राजस्थान के छात्र ने भी सुनाई आपबीती

राजस्थान के धौलपुर लौटे एमबीबीएस के छात्र शिवपाल ने बताया कि वहां बेहद डरावना माहौल है। छात्र ने इच्छा जताई की उसकी मेडिकल की आगे की पढ़ाई अगर यहीं हो जाए तो वो अब कभी यूक्रेन नहीं जाएगा। शिवपाल के घर लौटने के बाद उसके घर में जश्न जैसा माहौल है।

शिवपाल ने बताया. कि यूक्रेन में हालात बहुत ही गंभीर हो गए है और वहां पर लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे में वहां से बॉर्डर तक पहुंचना काफी मुसीबतों भरा हैं। शिवपाल ने बताया  कि 30 किलोमीटर पैदल चल कर वह बॉर्डर तक पहुंचा। कुछ स्टूडेंट वतन वापिसी कर चुके हैं और काफी छात्र बॉर्डर पर मौजूद हैं और भारतीय उड़ानों का इंतजार कर रहे हैं। युद्ध की परिस्थिति में यूक्रेन में छात्रों को स्थानीय सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। छात्र शिवपाल ने कहा कि मैं सकुशल घर वापसी के लिए सरकार को धन्यवाद देता हूं।

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