समाचार

जमशेदजी टाटा का ‘स्वदेशी मिल’ चमत्कार: TATA से फिर क्यों लगाई जा रही है ऐसी ही उम्मीद

टाटा भारत का सबसे विश्वसनीय ब्रैंड माना जाता है। भारत में उद्योग के बुनियादी ढांचे के स्वदेशी विकास में टाटा का योगदान काफी अहम रहा है। टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में हुआ था। लेकिन जमशेदजी टाटा जब 47 साल के थे तब उन्होंने एक ऐसा चमत्कार किया था, जिसे टाटा समूह ने बार-बार दोहराया और अब एक बार फिर पूरे देश को इसी तरह के चमत्कार की फिर उम्मीद है।

डूब चुकी स्वदेशी मिलको उबारा था

जमशेदजी टाटा ने मुंबई के ताज होटल  और टाटा स्टील  की स्थापना से भी पहले कपड़े का कारोबार किया था। उन्होंने 1.5 लाख रुपये के निवेश से 1874 में महाराष्ट्र के नागपुर में सेंट्रल इंडिया स्पिनिंग, वीविंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की शुरुआत की थी। बाद में यही मिल एम्प्रेस मिल (Empress Mill) बनी। कपड़े के कारोबार की सफलता से प्रभावित जमशेदजी टाटा ने 1886 में एक बड़ा काम अपने हाथ में लिया।

उन्होंने बंबई के कुर्ला में बनी धर्मसी मिल को फिर से उसकी शान वापस दिलाने का बीड़ा उठाया। ये कंपनी 4 साल से घाटे में चल रही थी। लेकिन उन्हे इस मिल में निवेश करना सही लगा, क्योंकि ये अपनी मूल कीमत के छठे हिस्से में मिल रही थी और एक फ्री-होल्ड जमीन पर बनी थी। उन्होंने इसका नाम बदलकर ‘स्वदेशी मिल’ रखा, लेकिन इसे खरीदना उनके लिए बहुत भारी साबित हुआ।

टाटा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी

दरअसल श्रमिकों की कमी, पुरानी और खराब मशीनरी एवं इस मिल के उत्पादों को लेकर लगातार आ रही शिकायतों ने Tata के नाम को ही दांव पर लगा दिया। दो साल बाद ही ये मिल शेयरधारकों को लाभांश देने में असफल रही और इसके शेयर की कीमत चौथाई रह गई।

लेकिन जमशेदजी टाटा ने हार नहीं मानी और इसे बचाने के लिए अपना सब कुछ लगा दिया, यहां तक की अपने निजी संसाधन भी। उन्होंने ‘स्वदेशी मिल’ में और पूंजी डाली, एम्प्रेस मिल के कुछ शेयर बेच दिए, नए इंजन, बॉयलर लगवाए, नए शेड बनवाये। इसके अलावा अपनी नागपुर की मिल से अनुभवी कर्मचारियों को वापस लाए और इसी के साथ देखते ही देखते स्वदेशी मिल कपड़ा उद्योग का एक चमकता सितारा बन गया।

जगुआर और लैंड रोवर को उबारा

स्वदेशी मिल के बाद भी टाटा ग्रुप ने इस तरह का जौहर बार-बार दिखाया। इसमें सबसे अहम काम कंपनी के मौजूदा मानद चेयरमैन रतन टाटा के कार्यकाल से जुड़ा है। उन्होंने जगुआर और लैंड रोवर  जैसे कार ब्रांड को घाटे से उबारा। इतना ही नहीं लंबे समय से घाटे में चल रही ब्रिटेन की कोरस स्टील का अधिग्रहण भी किया।

अब एअर इंडिया को उबारने की उम्मीद

हाल में टाटा समूह ने एअर इंडिया (Air India) का अधिग्रहण किया है। एअर इंडिया भी लंबे समय से घाटे में है और देश को भरोसा है कि टाटा इस कंपनी के दिन फिर से बदल देगा। वैसे भी एअर इंडिया की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप के जेआरडी टाटा ने ही की थी। टाटा की इसी विरासत की वजह से उसे आज देश में सबसे भरोसेमंद बिजनेस ग्रुप (Tata Trust) के तौर पर पहचान मिली हुई है।

Back to top button