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असम के मदरसे बदल जाएंगे स्कूल : मजहबी शिक्षा नहीं दे सकते सरकारी मदरसे : हाईकोर्ट

मदरसों को सामान्य स्कूल में तब्दील करने को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। शुक्रवार को दिए एक फैसले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार के उस कानून को बरकरार रखा है, जिसके तहत सरकार द्वारा वित्त पोषित सभी मदरसों को सामान्य स्कूल में तब्दील किया जाना है। मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने कानून की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया।

असम सरकार के कानून के खिलाफ यह याचिका 2021 में 13 व्यक्तियों की ओर से दायर की गई थी, और इसके माध्यम से राज्य सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सरकार द्वारा वित्त पोषित मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला जाना है। अदालत ने 27 जनवरी को सुनवाई पूरी कर ली थी और निर्णय सुरक्षित रख लिया था जिसे शुक्रवार को जारी किया गया।

कोर्ट ने कहा कि विभिन्न धर्मों वाले देश में सरकार को धार्मिक मामलों में तटस्थ रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “हम लोकतंत्र में और संविधान के अंतर्गत रहते हैं, जहाँ हर नागरिक बराबर है। इसलिए हमारे जैसे बहुधर्मी समाज में राज्य द्वारा किसी एक धर्म को वरीयता देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। इस प्रकार एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की प्रकृति है कि वह सुनिश्चित करे कि सरकार द्वारा वित्तपोषित किसी भी संस्थान में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाए।” यह संविधान के अनुच्छेद 28(1) के पालन के लिए जरूरी है।

कानून में क्या प्रावधान है?

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असम सरकार ने एक अप्रैल 2021 से राज्य में सभी सरकारी मदरसों को बंद करने और उन्हें स्कूलों में बदलने से जुड़ा एक विधेयक विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक में असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) कानून 1995 और असम मदरसा शिक्षा (कर्मचारियों की सेवा का प्रांतीयकरण और मदरसा शिक्षण संस्थानों का पुनर्गठन) कानून, 2018 को खत्म करने का प्रस्ताव है। विधेयक में यह प्रावधान है कि प्रदेश के सभी मदरसे उच्च प्राथमिक, उच्च और माध्यमिक स्कूलों में बदले जाएंगे। असम सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि शिक्षक और गैर शिक्षण कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा और यह पहले की तरह जारी रहेगा। असम में सरकार संचालित लगभग 683 मदरसे हैं।

करीब 700 मदरसे स्कूल में बदले जाएंगे

पूर्व में सरकार यह बता चुकी है कि सरकार की ओर से चलाए जाने वाले सभी 683 मदरसों को सामान्य विद्यालयों में परिवर्तित किया जाएगा और इसके साथ ही 97 संस्कृत टोल या विद्यालयों को भी कुमार भास्करवर्मा संस्कृत विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाएगा। इन संस्कृत टोल को शिक्षा और अनुसंधान के केंद्रों में बदला जाएगा जहां धर्म से परे भारतीय संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीयता की शिक्षा दी जाएगी।

himanta biswa sarma

सरकार के फैसले के बाद असम ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि निजी भागीदारी से जो मदरसे चलते हैं, उन्हें बंद नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा है कि विधानसभा और राज्य सरकार द्वारा लाए गए बदलाव सरकार द्वारा वित्त पोषित मदरसों के लिए ही हैं, निजी या सामुदायिक मदरसों के लिए नहीं हैं।

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