अध्यात्म

ऐसे काम करने वाले इंसान होते हैं राक्षस! शिव जी ने देवी पार्वती को बताया था ये राज़

श्रीरामचरितमानस में भगवान शिव और देवी पार्वती के एक प्रसंग का उल्लेख है। जिसमें भगवान शिव ने एक चौपाई के माध्यम से देवी पार्वती को ऐसे काम बताएं हैं जिनको करने वाले इंसान राक्षसी प्रवृति के होते हैं। ऐसे लोग मनुष्य योनि में जन्म तो लेते हैं लेकिन उन कामों के कारण वो पिशाच प्रवृति के होते हैं। People who do such work are monsters.

ये है वो चौपाई:

बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।

मानहिं मातु पता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।

जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।

इस चौपाई का अर्थ है – किसी दूसरे के धन और स्त्री पर बुरी नज़र रखने वाला, दुष्ट, चोर और जुआरी प्रवृति, माता-पिता और देवी- देवताओं का सम्मान न करने वाला व साधु संतों से अपनी सेवा करवाने वाला इंसान राक्षस है।

पराई स्त्री पर नज़र रखने वाला :

ये बात तो चाणक्य से लेकर कई पुराणों में भी लिखी हुई है कि पराई स्त्री पर नज़र रखना महापाप है। इसे मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण माना गया है। जो इंसान ऐसा करता है, उसका पतन भी निश्चित होता है। कई धर्म ग्रंथों में ऐसे अनेक बार ये बात बतायी गई है कि, जिसने भी पराई स्त्रियों पर नजर डाली और उसका सर्वनाश हो गया।

माता-पिता की बात न मानने वाला :

माता-पिता को दुनिया के सभी धर्मों में पूजनीय माना गया है। क्योंकि माता-पिता अपनी संतान के लिए अनेकों त्याग और बलिदान देते हैं। ऐसे लोग जो अपने कर्मों से अपने माता-पिता को दुख देते हैं या उनके मन को पीड़ा पहुंचाते हैं, उन्हें राक्षस प्रवृति का माना गया है। राक्षस प्रवृति का मनुष्य भी अपने बुजुर्गों से बात करते समय मान-मर्यादा, उचित-अनुचित आदि का ध्यान नहीं रखता।

चोरी तथा जुआ खेलने वाला :

चोरी करने व जुआ खेलने को हमेसा से ही पाप माना गया है। चोरी का अर्थ बिना किसी परिश्रम के दूसरे के धन को लेना तथा जुआ यानी छलपूर्वक धन अर्जित करना है, इन दोनों अवगुणों को राक्षसी प्रवृत्ति का माना गया है। इन दोनों अवगुणों की वजह से न सिर्फ व्यक्ति का नाश होता है बल्कि उसके परिवार, समाज व राज्य का भी पतन हो जाता है।

दूसरे के धन पर नज़र रखने वाला :

दूसरे के धन पर नज़र रखने वाला व्यक्ति कभी भी खुश नहीं रह सकता। ऐसे लोग जो अपने धन से संतुष्ट नहीं रहते, वो प्रवृत्ति राक्षस के होते हैं। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि राक्षस भी स्वयं मेहनत नहीं करते और दूसरे लोगों के धन को बलपूर्वक छिनकर उसका उपभोग करने कि फिराक में रहते हैं। इसलिए दूसरों के धन पर नज़र नहीं रखना चाहिए।

भगवान को न मानने वाला :

ऐसा व्यक्ति जो भगवान में विश्वास नहीं करता, उन्हें नास्तिक कहा गया है। राक्षस भी ऐसा ही करते हैं, वे स्वयं को ही शक्तिशाली मानते हैं। भगवान अनंत है उसे किसी एक मूर्ति या तस्वीर में कैद नहीं किया जा सकता है। भगवान शक्ति का रुप है जो पूरे संसार पर नियंत्रण रखती है। ऐसे मनुष्य जो इस शक्ति को मानने से इंकार करते हैं, वो वाकई में राक्षस प्रवृति के होते हैं।

 साधुओं से सेवा करवाने वाला :

सनातन या हिन्दु धर्म में साधु-संतों को बहुत सम्मान दिया जाता है। इसलिए जो व्यक्ति साधु-संतों का अपमान करते हैं व उनसे अपनी सेवा करवाते हैं, वे भी राक्षस प्रवृति के होते हैं। साधु-संत सभी मनुष्यों को समान भाव से देखते हैं और हमेशा ईश्वर की आराधना करते हैं। इसलिए जो व्यक्ति ऐसे सीधे-सादे साधु-संतों को परेशान करता है, वो कभी भी अपने जीवन में कभी सुखी नहीं रह पाता।

 

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