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इन वजहों से कमजोर हो जाते हैं बच्चे अंग्रेजी में, बाद में होती है कई परेशानी, जानें!

नई दिल्ली: आज के समाज में अंग्रेजी का बहुत महत्व है। जो व्यक्ति अंग्रेजी में बात करता है उसे काफी पढ़ा-लिखा और सभ्य समझा जाता है। इसके उलट जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते हैं, उन्हें लोग अनपढ़ और गंवार समझते हैं। इसलिए आजकल के सभी माता-पिता अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहते हैं, ताकि उनका बच्चा समाज में सभ्य और समझदार बनने के लिए अंग्रेजी बोल सके।

आजकल भारत में भी केवल उन्ही लोगों को नौकरी मिल पा रही है, जो अच्छी अंग्रेजी जानते हैं। ऐसे में लोगों का अंग्रेजी ना जानना ही बेरोजगारी की वजह बन रहा है। कई कैंडिडेट्स तो इतने अच्छे हैं, लेकिन उन्हें अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान नहीं है, इस वजह से वह पीछे रह जाते हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे से पता चला है कि शिक्षा के मामले में विकसित देशों की बराबरी करने में भारत की कई पीढियां गुजर जायेंगी।

स्कूलों में योग्य शिक्षकों की है काफी कमी:

भारत में शिक्षा के मामले में सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल सबकी हालत लगभग एक जैसी है। यहाँ स्कूल शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि व्यापार के नजरिये से खोले जा रहे हैं। ऐसे में अच्छे दर्जे की शिक्षा मिल पाना मुश्किल है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का सरकार का दावा भी फेल होता हुआ दिख रहा है। अंग्रेजी मध्यम स्कूल में पढ़ने वाले 50 प्रतिशत बच्चे अंग्रेजी में कमजोर हो जाते हैं।

भारत में इस समय योग्य शिक्षकों की काफी कमी है। यहाँ लगभग सभी सरकारी स्कूलों में पैरवी के आधार पर शिक्षकों को रखा जा रहा है। ऐसे में कई शिक्षक केवल नाम के शिक्षक होते हैं। अगर ढंग से उनसे कुछ पूछ दिया जाए तो वह बताने में फेल हो जाते हैं। अब जब शिक्षक ही ऐसे होंगे तो वह बच्चों को कहाँ से अच्छी शिक्षा देंगे। इसी वजह से भारत के आने वाले बच्चों का भविष्य बिगड़ता जा रहा है।

माँ-बाप का अंग्रेजी ना जानना भी है कारण:

प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी पर काफी जोर दिया जाता है। वहाँ बच्चों को अंग्रेजी में ही बात करने के लिए कहा जाता है। जो बच्चा ऐसा नहीं करता है, उड़े दंड भी दिया जाता है। अंग्रेजी माध्यम में कई ऐसे बच्चे भी पढ़ते हैं, जिनके माँ-बाप अंग्रेजी का एक शब्द भी नहीं जानते हैं। ऐसे में बच्चा स्कूल में अंग्रेजी सीखकर आता है और घर पर सब बराबर हो जाता है। जिन बच्चों के माता पिता भी अंग्रेजी में बात करते हैं, उनके बच्चे अपने आप अंग्रेजी बोलने लगते हैं। ऐसे ही धीरे-धीरे हिंदी भाषी घर का बच्चा अंग्रेजी भूलकर हिंदी या अन्य भाषाएँ बोलने लगता है।

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