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Boss हो तो ऐसा, कंपनी के 500 कर्मचारियों को बना दिया करोड़पति, चाहता है सबके पास हो BMW

हर कंपनी अपना खुद का फायदा करने के बारे में ही सोचती है। वह खुद करोड़पति बनकर अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कंपनी से मिलाने जा रहे हैं जो अपने कर्मचारियों के सपने पूरे करने में यकीन रखती है। यही वजह है कि उन्होंने एक झटके में अपने 500 कर्मचारियों को करोड़पति बना दिया। ये कंपनी कर्मचारियों में सैलरी नहीं, कंपनी का हिस्सा बांटती है।

दरअसल हम यहां आईटी कंपनी फ्रेशवर्क्स इंक (Freshworks Inc) की बात कर रहे हैं। इसके फाउंडर और सीईओ गिरीश मातृभूतम (Girish Mathrubhootam) हैं। गिरीश का कहना है कि मैंने ये कंपनी अपने लिए बीएमडब्ल्यू खरीदने को शुरू नहीं की थी, बल्कि मैं चाहता हूं कि इसका हर कर्मचारी बीएमडब्ल्यू का मालिक बने।

बीते बुधवार अमेरिकी एक्सचेंज नैसडैक (Nasdaq) पर बिजनेस सॉफ्टवेयर फर्म फ्रेशवर्क्स इंक (Freshworks Inc) की शानदार एंट्री हुई। ऐसा होते ही कंपनी के 500 भारतीय कर्मचारी करोड़पति बन गए। इसमें 69 को 30 साल से भी कम उम्र वाले हैं। यह इंडिया की पहली सॉफ्टवेयर एज सर्विस (SaaS) और यूनिकॉर्न कंपनी है जिसने नैसडैक की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। कंपनी के शेयर ने अपने इश्यू प्राइस से 21 प्रतिशत अधिक प्रीमियम पर नैसडैक इंडेक्स में एंट्री की है। ऐसा होने से कंपनी का मार्केट कैप 12 अरब डॉलर को पार कर गया।

फ्रेशवर्क्स के दो-तिहाई कर्मचारी उसके शेयरहोल्डर ही हैं। कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ मातृभूतम कहते हैं कि कर्मचारियों ने कंपनी को बनाने में दिन रात पसीना बहाया है, इसलिए उन्हें भी इसका इनाम अवश्य मिलना चाहिए। फ्रेशवर्क्स एक ग्लोबल कंपनी है जिसके ग्राहक 120 से ज्यादा देशों में हैं। वैसे इसका अधिकतर रेवेन्यू अमेरिका से ही आता है।

मातृभूतम ने क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वे बिजनेस वाले परिवार से ताल्लुक नहीं रखते हैं। उनके पिता बैंक में जॉब करते थे। उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की है। इसलिए वे एक आम कर्मचारी के सपनों को अच्छे से समझते हैं। उनका मानना है कि यदि आप सफल होना चाहते हैं तो पहले सपने देखना शुरू कीजिए। उन्होंने कंपनी की इस उपलब्धि पर फ्रेशवर्क्स के सभी कर्मचारियों को धन्यवाद कहा। वे बोले कि कंपनी को मैंने अकेले ने नहीं बल्कि हम सभी ने मिलकर बनाया है।

मातृभूतम तमिल सुपरस्टार रजनीकांत के बहुत बड़े फैन हैं। जब भी कोई रजनीकांत की नई फिल्म रिलीज होती है तो वह अपने कर्मचारियों के लिए चेन्नई में पूरा हॉल बुक करवा देते हैं। उन्होंने तो अपने आईपीओ का नाम भी प्रोजेक्ट सुपरस्टार रखा था। 2010 में शुरू हुई फ्रेशवर्क्स स्टार्टिंग में क्लाउड बेस्ड कस्टमर सर्विस सॉफ्टवेयर पर काम करती थी। मातृभूतम और शान कृष्णसामी इसके शुरुआती कर्मचारी और को-फाउन्डर थे।

मातृभूतम ने तंजौर की शास्त्र युनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया है। वे जोहो (ZOHO) में काम कर चुके हैं। फ्रेशवर्क्स जब स्थापित हुई तब दुनिया में कई कंपनियां इस सेक्टर में पहले ही अपने पैर पसार चुकी थी। ऐसे में इस कंपनी की सफलता पर डाउट किया जा रहा था। 2011 में फ्रेशवर्क्स को Accel ने 10 लाख डॉलर की पहली फंडिंग दी थी। इसी वर्ष कंपनी को अपना पहला ग्राहक भी मिला। फिर कंपनी ने प्रॉडक्ट रेंज को बढ़ाते हुए सेल्स और सीआरएम भी इसमें शामिल कर दिया। बाद में फ्रेशवर्क्स को फ्रेशडेस्क के रूप में रिब्रांड किया गया।

2021 में कंपनी का एन्युअल रिकरिंग रेवेन्यू 49 फीसदी तेज हुआ जो कि 30 करोड़ डॉलर का आकड़ा पार कर गया। कंपनी अपने सेल्स मॉडल पर शानदार काम करती है। इनका बिजनेस मॉडल अपमार्केट सेल्स और उसके प्रोडक्ट पर बेस्ड है। सामान्यतः बिजनेस सॉफ्टवेयर महंगा है और यूज करने में कठिन होता है। ऐसे में फ्रेशवर्क्स ‘रेडी टू गो’ सॉफ्टवेयर बनाती है। इसे यूज करना भी बड़ा आसान होता है। इसे और भी इजी करने के लिए कंपनी ने कस्टमर केयर कॉल सपोर्ट भी बनाया है।

फ्रेशवर्क्स के ऑफिस पेरिस, नीदरलैंड्स और फ्रांस जैसे कई देशों में हैं। स्टीडव्यू कैपिटल, एस्सेल, कैपिटल जी, सिकोया कैपिटल, टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट जैसी कंपनियों ने फ्रेशवर्क्स में बड़े लेवल पर इन्वेस्ट किया है।

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