उत्तर प्रदेश में सीएम योगी खत्म करेंगे शिया और सुन्नी वफ्फ बोर्ड, जानें क्यों?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की कमान संभालते ही सीएम योगी ने प्रदेश के विकास के लिए पहले दिन से ही काम शुरू कर दिया। आते ही उन्होंने प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एंटी रोमियो दल की स्थापना की। इस दल को लेकर विरोधियों ने उनपर जमकर निशाना भी साधना चाहा लेकिन वो पीछे नहीं हटे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी यह स्वीकार किया कि एंटी रोमियो दल का गठन सही हुआ है।

शिया और सुन्नी के वफ्फ बोर्ड को बंद करवाने का ऐलान किया :

First interview of cm yogi

इसके साथ ही योगी ने प्रदेश के सभी वर्ग और धर्म के लोगों के विकास के लिए भी काम करना शुरू कर दिया। प्रदेश की खराब हो चुकी शिक्षा व्यवस्था पर भी काम शुरू हो गया। पहले प्रदेश में जमकर नकल करवाई जाती थी। उन्होंने आते ही कहा की अब से जिस भी केंद्र पर परीक्षा होगी, वहां की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई जायेगी। इसके साथ ही उनकी सरकार ने छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति की भी घोषणा की।

योगी ने प्रदेश के मुस्लिम समुदाय के लोगों के हित के लिए भी मन से काम करना शुरू कर दिया है। भले ही कुछ लोग उन पर यह आरोप लगाते रहे हों कि वह मुस्लिम विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के बाद से उन्होंने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि वह मुस्लिम विरोधी हैं। हाल ही में उन्होंने शिया और सुन्नी के वफ्फ बोर्ड को बंद करवाने का ऐलान किया है।

वफ्फ बोर्ड में हुए घोटाले की वजह से किया बंद करने का फैसला:

जी हां सीएम योगी ने प्रदेश की शिया और सुन्नी वफ्फ बोर्ड को बंद करवाने का ऐलान किया है। लेकिन इसके पीछे कोई और कारण नहीं बल्कि इन बोर्डों में हुआ घोटाला है। गुरुवार को सीएम योगी ने बोर्ड में हुए घोटाले के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश की है। प्रदेश के वफ्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने यह बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने शिया और सुन्नी वफ्फ बोर्ड में वफ्फ संपत्तियों के करोड़ो रूपये के हुए घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला लिया है।

रजा ने बताया कि वफ्फ काउंसिल ऑफ इंडिया की जांच के दौरान दोनों ही बोर्ड में सैकड़ों करोड़ रूपये के घोटाले की बात सामने आयी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने इन दोनों बोर्डों को भंग करने के निर्देश दिए हैं। वफ्फ काउंसिल ऑफ इंडिया ने वफ्फ संपत्तियों को गैर कानूनी तरीके से खरीदे और बेचे जाने की शिकायतों को सही पाया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि इस घोटाले की जांच राष्ट्रीय स्तर की सीबीआई या अन्य किसी एजेंसी से करवाई जाए।

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