आखिरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने आ ही गयी पाकिस्तान की सच्चाई, पाकिस्तान सरकार है सेना की ..

पाकिस्तान का नाम आते ही दिमाग में बस एक ही नाम आता है आतंक का घर। पाकिस्तानी सरकार और वहां की सेना मिलकर आतंकवादियों को संरक्षण और धन देते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान इस समय आतंक का गढ़ बन गया है। अब तक तो लोगों को लगता था कि पाकिस्तान की सरकार स्वतंत्र रूप से कार्य करती है और निर्णय लेती है। लेकिन यह लोगों का बस भ्रम था।

आतंक के पनाह के रूप में जाना जाता है पाकिस्तान:

दरअसल सच्चाई इसके विपरीत है। जी हां! पाकिस्तान की सरकार अपना कोई भी फैसला खुद से नहीं लेती है। वह कोई भी फैलसा लेने से पहले सेना की अनुमति लेती है। जब सेना उसपर मुहर लगाती है, तभी सरकार उसपर अमल करती है। आतंक की पनाह के रूप में जाना जाने वाला पाकिस्तान उस समय सबके सामने बेनकाब हो गया जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तानी सेना का एक बड़ा अधिकारी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को निर्देश दे रहा था।

भारतीय प्रधानमंत्री ने बेबाकी से रखी अपनी बात:

आपको ज्ञात होगा कि इस समय भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में हिस्सा लेने के लिए गए हैं। जब भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू हुई तो भारतीय प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखनी शुरू कर दी। वह बेबाकी से अपनी बात सबके सामने रख रहे थे। लेकिन ये क्या जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को बोलना था तो उनके कान में कोई कुछ कह रहा था।

पाकिस्तान सरकार नहीं लेती अपना कोई भी फैसला खुद से:

जी हां! वह सेना का एक बड़ा अधिकारी था जो उनके कान में कुछ कह रहा था। वह उसकी बातों को दुहरा रहे थे। इससे साफ पता चलता है कि पाकिस्तानी सरकार सेना की कठपुतली है। वह अपना कोई भी फैसला खुद से नहीं ले सकती है। यहां तक कि स्वयं से वह कुछ बोल भी नहीं सकती है। अधिकारी की बात को सुनकर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हामी भर रहे थे। इससे साफ पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना के आगे वहां के प्रधानमंत्री भी बेबस हैं।

विदेश मामलों में भी होता है सेना का दखल:

पाकिस्तान किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सेना की ही भाषा बोलता है। वह खुद से कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं करता है। पाकिस्तान में सभी बड़े फैसले सेना की मर्जी से ही किये जाते हैं। पूरी दुनिया यह जानती है कि पाकिस्तान के विदेश मामलों में सेना का दखल होता है। केवल यही नहीं पाकिस्तान सरकार कोई भी फैसला बिना सेना से सलाह लिए नहीं करती है।