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अफगान कमांडर ने सुनाई हार की पूरी कहानी, बताया- क्यों अफगान की सेना लड़ने से पहले ही हार गयी

अफगानिस्तान के एक कमांडर ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के उस बयान की निंदा की है। जिसमें उन्होंने अफगान सेना को डरपोक कहा था। अफगान सेना के एक कमांडर ने लेख लिखते हुए कहा कि उनके देश की हार के पीछे अमेरिका जिम्मेदार है। सामी सादत नामक इस कमांडर के अनुसार ‘अफगानिस्तान युद्ध का फैसला तभी हो गया था। जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से निकलने की आखिरी तारीख तय कर दी थी’।

बुधवार को प्रकाशित एक लेख में सामी सादत ने कहा कि वो अफगान सेना में ‘थ्री स्टार जनरल’ थे। दक्षिण-पश्चिमी अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने अपने सैकड़ों अधिकारियों को मरते हुए देखा है। अफगान युद्ध में उन्होंने 15 हजार अफगान सैनिकों का नेतृत्व किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे लेख में इन्होंने कहा कि यह सच है कि अफगान सेना ने लड़ने की इच्छा खो दी थी। लेकिन ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका लगातार बाहर निकल रहा था। राजनीतिक सपोर्ट मिलना बंद हो चुका था। अफगान सेना को कोई देखने वाला नहीं था। खाने-पानी तक की सुविधाएं नहीं थीं और अंतिम महीनों में अमेरिका के राष्ट्रपति ने अफगान सेना का अपमान करना शुरू कर दिया था। सामी सादत ने कहा कि अमेरिका की तरफ से अफगान सेना के साथ बेवफाई की गई। ऐसा नहीं है कि अफगान सेना की गलतियां नहीं है। अफगान सेना की भी कई कमियां थीं।

कमांडर ने अपने लेख में कहा कि मुझे ये देखकर दुख होता है कि जो बाइडेन और पश्चिमी देशों के सैन्य अधिकारी बिना कारणों को बताए अफगान सेना पर सरेंडर करने का आरोप लगा रहे हैं। पिछले 20 सालों में अफगानिस्तान सेना ने 66 हजार जवानों को गंवाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति कहते हैं कि अफगानिस्तान सेना ढह गई, बिना लड़े अफगानिस्तान सेना हार गई, जबकि ये गलत आरोप है। हम आखिरी वक्त तक लड़े और हमने अपने सैन्य शक्ति का पांचवां हिस्सा गंवा दिया।

अफगान कमांडर ने कहा कि ‘जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान में नहीं लड़ना चाहिए, उन्हें अफगानिस्तान में जान नहीं देना चाहिए, जान देने का काम अफगानिस्तान के सैनिकों का है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकन सैनिकों ने लड़ना बंद कर दिया। जो बाइडेन के बयान ने उन अमेरिकी सैनिकों को भी गुस्से में भर दिया था, जिन्होंने अफगान सैनिकों को ट्रेन किया था’। ये काबुल और वॉशिंगटन के नेताओं की हार हुई है। क्योंकि दोनों जगहों के राजनेताओं की गलती थी।

अफगानिस्तान सेना के कमांडर सामी सादत ने आगे लिखा कि अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारी भ्रष्टाचार किए हैं। वहीं जो बाइडेन ने ये फैसला उस वक्त लिया, जब लगातार उन्हें अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में बताया जा रहा था।

अफगान सेना के कमांडर ने अपने लेख में लिखा है कि ‘अप्रैल महीने तक 17 हजार अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर अफगानिस्तान छोड़कर जा चुके थे। अमेरिकी वायु सेना के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और सी-130 विमानें खराब हो गए थे। ठेकेदार अपने साथ मालिकाना सॉफ्टवेयर और हथियारों का वो सिस्टम भी लेकर चले गए थे। जिनसे ये हेलीकॉप्टर ठीक हो पाते।’ जो स्थिति इन दिनों अफगान की है उसके लिए अमेरिका जिम्मेदार है।

गौरतलब है कि अमेरिका सेना के अफगान से जाते ही तालिबान ने इस देश पर अपना कब्जा कर लिया है। तालिबान यहां पर अपनी सरकार बनाने की तैयारी कर रहा है। साथ में ही महिलाओं के लिए रोजाना नए फरमान जारी कर रहा है। तालिबान ने देश की महिलाओं को घर में ही रहना का आदेश जारी किया है। वहीं जो महिलाएं बाहर जाकर काम करती थी उन्हें नौकरी छोड़ने को कहा है।

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