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एक्शन में आयी मोदी सरकार, 6 महीने में ही पूरी की जाएगी भ्रष्ट बाबुओं की जांच!

मोदी सरकार ने पहले ही कहा था कि वह भ्रष्टाचार को बर्दास्त नहीं करेगी। भ्रष्टाचार उसके नेताओं द्वारा किया जाए या किसी और के द्वारा, सबको सजा दी जाएगी। कुछ दिनों पहले काला धन पर नकेल कसने के लिए नोटबंदी जैसी योजना लाई गयी तो अब वहीं भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है।

सरकारी बाबुओं पर कसी नकेल :

सरकारी क्षेत्र में भ्रष्टाचार कम करने के लिए मोदी सरकार ने बाबुओं पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने केन्द्रीय सिविल सेवा नियम 1965 में बदलाव किये हैं। इसमें जांच और पूछताछ के लिए समय सीमा तय की गयी है। इसके अनुसार अगर किसी सरकारी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप है तो उसकी जांच 6 महीने के अन्दर पूरी कर ली जाएगी।

इस फैसले से लम्बे समय से लटके हुए जांच के कामों में तेजी आएगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि बेहतर और संतोषजनक कारणों के चलते जो जांच एजेंसी को अतिरिक्त समय दिया जाता है उसकी अवधि भी 6 महीने से ज्यादा नहीं होगी। अगर एक बार किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगता है और उसे आरोपों की प्रति मिल जाती है तो उसे 15 दिन के अन्दर अपने बचाव में लिखित बयान देना होता है।

जवाब देने की सीमा बढ़ाई जा सकती है 15 दिन:

वह यह भी इच्छा जाहिर कर सकता है कि सुनवाई के दौरान उसे व्यक्तिगत रूप से सुना जाए। इसके लिए भी समय सीमा केवल 15 दिन के लिए बढ़ाई जा सकती है। चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये अपने बचाव में सरकारी अधिकारी को 45 दिन के अन्दर ही लिखित जवाब देना होगा। अन्यथा उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यह नया नियम सभी वर्ग के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। इसमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के साथ ही कुछ अन्य वर्ग के अधिकारी भी शामिल हैं। हाल ही में सतर्कता आयोग ने पाया कि अनुशासनिक प्रक्रिया में जांच के लिए इससे सम्बंधित विभाग 2 साल से भी ज्यादा का समय लेते हैं। एक मामले में यह समय 8 साल था। इसी के बाद से यह नियम लाना जरूरी हो गया था।

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