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जानें, कहां रमजान के पावन महीने में मस्जिदों से दागे जाते हैं तोप के गोले?

रमजान का पावन महीना शुरू हो चुका है। यह महीना मुस्लिम धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में रोजा रखकर मुस्लिम धर्म के लोग अल्लाह को प्रसन्न करते हैं और पूरे साल किये गए अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं। यह पूरा महिना प्रेम और उल्लास का महीना होता है। इस महीने में देश के हर कोने में अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं।

रमजान में देखने को मिलते हैं अलग-अलग रंग:

हर जगह की अपनी कुछ खासियत होती है। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में इस समय वहां की रंगत देखते ही बनती है। महीने के आखिर में ईद के दिन लोग एक दूसरे से गले मिलकर उन्हें बधाई देते हैं और अच्छे जीवन की कामना करते हैं। भारत विविधताओं का देश है, यहां रमजान के महीने में एक अलग ही रंग देखने को मिलता है।

रोजा इफ्तार और सहरी के समय हर जगह अपनी-अपनी परम्पराओं का असर देखा जा सकता है। ऐसा ही एक शहर है भोपाल, जहां रमजान के महीने से जुड़ी अपनी एक अलग ही परम्परा है। रायसेन स्थित मस्जिद में आज भी पारम्परिक तोप के गोले दागकर यह सूचना दी जाती है कि चांद दिख गया है। जी हां चांद दिखने की सूचना तोप के गोले दागकर दी जाती है।

मस्जिद के काजी दागते हैं गोले:

चांद का दीदार होने के बाद शहर के काजी मस्जिद से बारूदी तोप के गोले दागकर लोगों को इसकी सूचना देते हैं। तोप के गोलों की आवाज सुनकर लोगों को पता चल जाता है कि कल से रोजा रखना है। केवल यही नहीं रमजान के पूरे महीने में मस्जिद से तोप के गोले दागे जाते हैं ताकि लोगों को सहरी और इफ्तार का वक्त पता चल सके। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार मस्जिद कमेटी ने दागने के लिए खास तरह के गोले मंगाए हैं।

इन गोलों को दागे जाने पर रंगीन धुंआ दिखाई देगा, मस्जिद कमेटी के प्रभारी यासिर अराफात ने बताया कि भोपाल के अलावा सीहोर और रायसेन में गोले भेजने का जिम्मा मस्जिद कमेटी का है। कमेटी भोपाल में 50, रायसेन में 20 और सीहोर में 30 मस्जिदों को गोले भेजने का काम करती है। रमजान के महीने में लगभग हर मस्जिद को 60-60 गोले दिए जाते हैं। इन गोलों को दागने से पूर्व जिले के डीएम से खासतौर पर लाइसेंस लिया जाता है। रायसेन में किले में रखी हुई पुरानी तोप से ही वहां गोले दागे जाते हैं।

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