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रामानंद सागर धारावाहिक में ”सुमंत” का किरदार निभाने वाले राजा दशरथ के महामंत्री का हुआ निधन

चौकीदार से लेकर राजा दशरथ के महामंत्री बनने तक का सफ़र तय करने वाले चंद्रशेखर वैद्य का हुआ निधन, निजी जीवन संघर्षों से रहा भरा...

रामानंद सागर की “रामायण” लोकप्रिय धारावाहिकों में से एक थी। जिसके दीवाने आज भी हैं। बता दें कि यह रामानंद सागर की ”रामायण” की ही खासियत है कि इस धारावाहिक ने कई कलाकारों को एक अलग पहचान दिलाई है। 1986-1988 के बीच प्रसारित हुए इस सीरियल के एक्टर्स को लोग उनके असली नाम की जगह किरदार के नाम से ही जानने लगे। रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल और माता सीता के किरदार में नजर आईं दीपिका चिखलिया की जिंदगी तो रातों रात बदल गई थी। लोग उनमें श्रीराम और माता सीता की छवि देखने लगे थे।

Chandrashekhar vaidya fame sumant

ये सीरियल इतना पॉपुलर था कि रामानंद सागर की रामायण का एक-एक किरदार लोगों को आज भी याद है। उन्हीं में से एक किरदार था राजा दशरथ के महामंत्री ‘सुमंत’ का। जिनका असली नाम तो चंद्रशेखर वैद्य था, लेकिन उनके असली नाम से ज़्यादा प्रसिद्धि उनके द्वारा रामायण धारावाहिक में निभाया गया किरदार फ़ेमस हुआ। अगर किसी ने भी रामायण देखी होगी तो महामंत्री सुमंत के किरदार से अवश्य परिचित होगा। चलिए जिनको नहीं पता उन्हें बता दें कि सुमंत अयोध्या के सात मंत्रियों के बाद में आठवें मंत्री थे। लेकिन राजा दशरथ उन्हीं से सलाह लेते थे। वह सुमंत ही थे जो राम, सीता और लक्ष्मण को वनवास के दौरान अपने रथ में अयोध्या से गंगा के तट तक छोड़ने गए थे।

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मालूम हो कि महाराजा दशरथ के महामंत्री का किरदार अदा करने वाले सुमंत यानी चंद्रशेखर वैद्य का आज सुबह 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। सुमंत यानी चंद्रशेखर वैद्य का जन्म साल 1923 में हैदराबाद में हुआ था, बहुत कम उम्र में ही वह फिल्मी दुनिया में आ गए थे। जिस वजह से उन्हें पढ़ाई छोड़ऩी पड़ी थी। बता दें कि चंद्रशेखर वैद्य का एक्टिंग करियर और निजी जिंदगी संघर्षों से भरी रही। उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने चौकीदार का काम किया था। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग में किस्मत आजमाई और सफल रहें।

Chandrashekhar vaidya

गौरतलब हो कि उन्होंने CINTAA एसोसिएशन का गठन भी किया। उन्होंने अपने करियर में 110 से ज्यादा फिल्में की। जिनमें से साल 1964 में आई फिल्म ‘चा चा चा’ और 1966 में आई फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ का उन्होंने निर्देशन भी किया। उन्होंने रामानंद सागर की रामायण में राजा दशरथ के महामंत्री सुमंत का किरदार निभाया था। इस रोल से उन्हें खूब लोकप्रियता हासिल हुई। चंद्रशेखर, रामानंद सागर के करीबी दोस्त थे। रामायण की उस स्टारकास्ट में वो सबसे उम्रदराज कलाकार थे।

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वही मालूम हो कि रामायण धारावाहिक के माध्यम से नाम कमाने वाले कई अन्य किरदार भी इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। जिनमें चंद्रशेखर वैद्य के अलावा सुग्रीव का किरदार निभाने वाले अभिनेता श्याम सुंदर कलानी का पिछले साल ही निधन हुआ था। वह काफी वक्त से कैंसर से जूझ रहे थे। वहीं रामानंद सागर की ‘रामायण’ में मेघनाद का किरदार निभाने वाले विजय अरोड़ा साल 2007 में पेट के कैंसर के चलते 62 वर्ष की अवस्था मे ही दुनिया को अलविदा कह गए थे।

ramayan character

रामायण में रावण के भाई विभीषण का किरदार मुकेश रावल ने निभाया था। उनकी मौत बहुत ही दुखद रही। साल 2016 में ट्रेन से कटकर उनकी मृत्यु हुई थी। जानकारी के अनुसार वह अपने बेटे की मौत के सदमे से जूझ रहे थे। जिसके बाद उनकी भी ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। रानी कैकेयी की दासी मंथरा का किरदार अभिनेत्री ललिता पवार ने निभाया था। उनका भी मुंह के कैंसर की वजह से 24 फरवरी 1998 को मौत हो गई थी। वही महाराजा दशरथ के महामंत्री सुमंत से जुड़े किस्सों की बात करें तो यह बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि सुमंत का किरदार निभाने वाले चंद्रशेखर वैद्य ने “भारत छोड़ो आंदोलन” में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था।

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वह साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा बने। इतना ही नहीं घर लौटने के बाद चंद्रशेखर वैद्य ने राम गोपाल मिल्स में काम किया। जिसके बाद दोस्तों के कहने पर चंद्रशेखर फिल्मों में किस्मत आजमाने मुंबई आ गए। उन्होंने 50 से लेकर 90 के दशक तक गेटवे ऑफ इंडिया, बरसात की रात, कटी पतंग, द बर्निंग ट्रेन, नमक हलाल, डिस्को डांसर, शराबी, त्रिदेव जैसी कई फिल्मों में काम किया। जिसके बाद उन्होंने रामायण में सुमंत का किरदार निभाया। जिस वक्त उन्होंने रामानंद सागर के रामायण में सुमंत का किरदार निभाया। उनकी आयु 65 वर्ष थी और ये सबसे उम्रदराज कलाकार थे। फ़िर भी इन्होंने अपनी कलाकारी से सभी का दिल जीत लिया और महामंत्री सुमंत के नाम से ही प्रसिद्धि पाई। जानकारी के लिए बता दें कि 13 साल की उम्र में ही उनकी शादी हो गई थी। वह पढ़ना चाहते थे, लेकिन 7वीं कक्षा तक की ही पढ़ाई कर पाए। उन्‍होंने साल 1954 में ‘औरत तेरी ये कहानी’ से ऐक्‍ट‍िंग की दुनिया में कदम रखा था।

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