यहां चूहे लगाते हैं इच्छाधारी नाग की परिक्रमा ..!

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चमत्कार या अंधविश्वास

गांव के कुछ बड़े बुज़ुर्गों का मानना है कि चूहापाली में पीले रंग का इच्छाधारी नाग रहता है, जो हज़ारों साल पुराना है, जिसके दर्शन सिर्फ किस्मतवालों को ही नसीब होते हैं.

मंदिर के आस-पास रहनेवाले लोग बताते हैं कि अक्सर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर से घंटियों की आवाज़ आती है. खासकर अमावस्या और पूर्णिमा के दिन जब मंदिर का ताला खोला जाता है तब मंदिर एकदम साफ सुथरा मिलता है,  जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे मंदिर खुलने से पहले किसी ने पूजा की हो.

मंदिर में मौजूद है गंधर्वसेन की मूर्ति

इस प्राचीन मंदिर में राजा गंधर्वसेन की मूर्ति स्थापित है. वैसे तो राजा गंधर्वसेन के बारे में कई किस्से-कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन इस गंधर्वसेन मंदिर से जुड़ी उनकी कहानी अजीब ही है.

ग्रामीणों का मानना है कि यहां पर राजा गंधर्वसेन मंदिर सात-आठ खंडों में था, जिसके बीचोबीच राजा की मूर्ति स्थापित थी, लेकिन अब सिर्फ राजा की मूर्ति वाला मंदिर ही बचा है.

लोगों का दुख हर लेते हैं नागराज

यहां के लोग बताते हैं कि चूहापाली में चूहों के बीच विराजनेवाले नागराज वर्षों से इस गांव के लोगों की रक्षा करते आ रहे हैं. नागराज की शरण में आनेवाले भक्तों का हर दुख मिट जाता है और उन्हें शांति का अनुभव होता है. नागराज के प्रति लोगों की आस्था उन्हें यहां खींच लाती है.

बहरहाल हजारों साल पुराने इस मंदिर की नींव, स्तंभ और दीवारें बौद्धकाल की बताई जाती है. लेकिन यह भी सच है कि यहां पर साक्षात रुप में इच्छाधारी नाग और उनकी परिक्रमा करनेवाले चूहों को किसी ने नहीं देखा है.

अब ये आपको तय करा है कि यहां सच में ऐसा चमत्कार होता है या फिर ये महज लोगों का अंधविश्वास है.

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