सुंदरकांड पाठ करने से जुड़े हैं ये अनेकों लाभ, जानें पाठ का महत्व व सही तरीका

हनुमान जी का पूजन करने से कई दुखों से निजात मिल जाता है और कई सारे ग्रह शांत भी हो जाते हैं। हनुमान जी की पूजा मंगलवार को की जाती है। इस दिन जो लोग सच्चे मन से इनकी पूजा करते हैं। उन्हें जीवन में कोई भी कष्ट नहीं होता है। हनुमान जी का पूजन करते समय इनसे जुड़े पाठों को करें। इन पाठों को करने से हनुमान जी की विशेष कृपा बन जाएगी। सुंदरकांड पाठ हनुमान जी से जुड़ा हुआ पाठ है, जिसे तुलसीदास द्वारा लिखा गया है। इस पाठ को पढ़ने से बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सुंदरकांड पाठ को पढ़ने से बल, बुद्धि और कृपा की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि जो लोग इस पाठ को करते हैं, उन्हें मनचाही चीज भी मिल जाती है। पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक आ जाती है और दुखों का नाश हो जाता है। नियमित अंतराल पर सुंदरकांड का पाठ करने से घर का माहौल भी सही बना रहता है और कारात्मक शक्तियां दूर चली जाती है। इसलिए हर व्यक्ति को घर में सुंदरकांड पाठ अवश्य करने चाहिए।

अगर आपको बुरे सपने आते हैं या फिर किसी चीज का भय है। तो भी आप इस पाठ को करें। इस पाठ को करने से भय दूर हो जाते हैं और मन शांत रहता है। इसी प्रकार से शत्रु पर विजय पाने के लिए भी ये पाठ करें।

किस तरह से करें सुंदरकांड पाठ

1.सुंदरकांड पाठ करने का सबसे सही दिन मंगलवार या शनिवार का होता है। इसलिए जब भी इस पाठ को पढ़ना शुरू करें तो दिन का ध्यान रखें और इस पाठ की शुरुआत मंगलवार या शनिवार के दिन से ही करें।

2. ये पाठ केवल शाम के समय ही किया जाता है। सुंदरकांड पाठ पढने का सबसे उत्तम समय शाम के सात बजे के बाद का होता है। इसलिए आप शाम को सात बजे के बाद ही इस पाठ को पढ़ें।

3. सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले खुद को स्वच्छ जरूर करें और हाथ और पैर धोने के बाद ही ये पाठ करने के लिए बैठें। आप चाहें तो इस पाठ को मंदिर में भी कर सकते हैं। लेकिन कई लोग घर में ही ये पाठ करते हैं। इसलिए अपनी इच्छा के अनुसार आप ये तय कर सकते हैं कि आपको ये पाठ कहा करना है।

4. सुंदरकांड का पाठ अगर आप घर में करते हैं, तो इसे पूजा घर में ही करें। ये पाठ करने से पहले अपने सामने हनुमान जी की एक मूर्ति रख लें। हो सके तो साथ में सीता-राम की मूर्तियां भी रख लें।

5. इस मूर्ति को आप किसी चौकी पर भी रख सकते हैं।

6. चौकी के सामने एक लाल रंग का आसन बिछा लें। इस आसन पर बैठकर ही आप ये पाठ करें। पाठ शुरू करने से पहले एक देसी घी का दीपक सामने जला लें। हनुमानजी की पूजा फल-फूल, मिठाई और सिंदूर से करें।

7. ये पाठ शुरू करने से पहले सीता-राम जी का नाम लें और उसके बाद इसे शुरू करें। ध्यान रहे की आप शब्दों का उच्चारण सही से करें।

8. ये पाठ पूरा करने में 2 घंटे से अधिक का समय लग जाता है। हालांकि ये जरूर नहीं की आप एक दिन में ये पूरा पाठ खत्म करें। आप चाहें तो अगले दिन भी इस पाठ को आगे से पढ़ सकते हैं। वहीं सुंदरकांड करते समय तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की भी पूजा करनी चाहिए।

9. नियमित रूप से रोज सुंदरकांड का पाठ करने से जल्द ही फल की प्राप्ति होती है।

10. जब ये पाठ पूरा हो जाए तो लोगों में प्रसाद भी बांट दें।