कराची में छिपा है यह खूंखार आतंकी, US मीडिया की रिपोर्ट में हुआ खुलासा!

पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान वह देश है जो आतंकवाद को न सिर्फ पनाह डेटा है बल्कि स्पोन्सर भी करता है. पाकिस्तान में ही दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन कड़ी सुरक्षा के बीच आराम से रहता था. वह पाकिस्तानी आर्मी की नाक के नीचे था और पाकिस्तान इस बात का दावा करता रहा कि उसे पता तक नहीं था.

ISI की पनाह में आतंकी है अयमान अल जवाहिरी :

जब साल 2011 में अमेरिकी कमांडोज ने उसे खोज कर मार गिराया तो दुनिया के सामने पाकिस्तान का दोहरा चरित्र साबित हो गया. अभी एक और बड़ा खुलासा हुआ है अमेरिका की एक न्यूज एजेंसी की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गाय है कि एक और मोस्ट वांटेड और बेहद खतरनाक आतंकी पाकिस्तान के कराची शहर में ISI की पनाह में चैन की जिंदगी बसर कर रहा है. वो आतंकी है अयमान अल जवाहिरी.

अयमान अल जवाहिरी एक ट्रेंड सर्जन था, उसका जन्म इजिप्ट में हुआ था. बताया जाता है कि वह ओसामा बिन लादेन का प्रमुख सलाहकार था और लादेन के मारे जाने के बाद आतंकी संगठन अलकायदा की कमान उसके हाथ में है. ऐसा पहली बार हुआ है कि अलकायदा के प्रमुख की लोकेशन से जुडी कोई खबर किसी न्यूज पोर्टल पर आई है.

जवाहिरी के कराची में होने की सम्भावना :

अमेरिकी मैगजीन न्यूजवीक ने अपनी एक रिपोर्ट में अधिकारिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि जब 2001 में अमेरिकी सेना ने अलकायदा को अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. तब से जवाहिरी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI पनाह दे रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाहिरी के कराची में होने की सम्भावना अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व एजेंट और यूएस सिक्यूरिटी एक्सपर्ट ब्रूस रिडिल ने जानकारी दी कि जवाहिरी की लोकेशन के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं मगर इस बात के कई संकेत जरूर हैं जिनमें एबटाबाद से मिले दस्तावेज शामिल हैं. उनका कहना है कि कराची जवाहिरी के छिपने के लिए आरामदेह जगह होगी, क्योंकि उसे लगता होगा कि वहां अमेरिकी पहुंच कर उसे नहीं पकड़ सकते हैं. क्योंकि कराची में वैसी कार्रवाई करना मुश्किल है जैसी ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए एबटाबाद में की गयी थी.

रिपोर्ट में बताया गया है कि जवाहिरी को ब्लैक लेग के तहत कराची भेज दिया गया था. दरअसल ब्लैक लेग तालिबान का कोड नाम था. तालिबान के एक पूर्व मंत्री का हवाला देते हुए यह दावा किया गया है कि अल जवाहिरी और अल कायदा ज्यादा लम्बे वक्त तक साथ नहीं रह सके, क्योंकि तालिबान बाद में अफगान सरकार के साथ शांति समझौता करने में जुट गया था. इसका कारण यह था कि वह नहीं चाहता था कि तालिबान की छवि शांति के लिए खतरे के तौर पर बने.

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