चाणक्य : ये 3 अवगुणों वाली स्त्रियां होती है खुद की भी दुश्मन, भूलकर भी पुरुष न जाए इनके आस-पास

सदियों बाद भी आज भी मानव समाज के लिए आचार्य चाणक्य द्वारा कही गई बातें उतनी ही लाभदयक साबित होती है, जितनी कि उनके समय थी. महान आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कई ऐसी बातों को जगह दी है जो आज की इस भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी और आगे निकलने की होड़ वाली दुनिया में बहुत ही कारगर साबित हो सकती है.

आचार्य चाणक्य ने समाज के साथ ही व्यक्ति विशेष के उद्धार के लिए भी तरह-तरह की बातें कही है. ऐसे ही आचार्य चाणक्य स्त्रियों के बारे में भी बहुत कुछ कहते हैं. चाणक्य के मुताबिक़, पतिव्रता, संस्कारी और गुणवान स्त्री अपने घर को स्वर्ग बना देती है, वहीं इसके उलट अवगुणों से युक्त स्त्री खुद के और अपने घर के नाश के साथ ही दूसरों का भी नाश कर देती है. आइए आज आपको स्त्रियों के ऐसे ही तीन अवगुण बताते है, जिनसे उन्हें दूरी बनाकर रखनी चाहिए. जबकि पुरुषों को भी ऐसी स्त्रियों के संपर्क में नहीं आना चाहिए.

अहंकार मानव को कभी भी ऊंचा नहीं उठाता है, वह सदा व्यक्ति को नीचे लाने का ही काम करता है. अहंकार के चलते ही भगवान श्री राम ने लंकापति रावण की इतनी बुरी दशा की थी कि आज भी वह बुराई के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. अतः यह गुण स्त्रियों को भी कतई शोभा नहीं देता है. अहंकार वाली स्त्री से माता लक्ष्मी भी दूरी बना लेती है, साथ ही सुख-समृद्धि धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है. अतः चाहे धन संपत्ति हो या फिर सौंदर्य, स्त्री किसी भी चीज का कभी भी अहंकार न करें.

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमें ऐसी स्त्रियों से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो अज्ञानी हो. आचार्य चाणक्य के कहने का मतलब साफ़-साफ़ हैं कि स्त्रियों का थोड़ा बहुत शिक्षित होना भी बहुत आवश्यक हैं. अनपढ़ या अशिक्षित स्त्रियों का जीवन बेहतर नहीं होता हैं. वे घर, परिवार और समाज का भी उत्थान नहीं कर पाती है. औरतों को घर की लक्ष्मी की संज्ञा दी जाती है और पूरा घर वे ही संभालती है, ऐसे में यह परम आवश्यक हो जाता है कि वे पढ़ी-लिखी हो.

कहते है कि लालच बुरी बला है. अर्थात लालच व्यक्ति को कभी संतुष्ट नहीं करता है. यह जितना बढ़ता जाता है, हमारे सुख में अभाव होने लगता है और लालच अपने साथ व्यक्ति के दुःख को भी बढ़ाते रहता है. विशेषकर महिलाओं को किसी भी चीज का लालच नहीं करना चाहिए. यह अवगुण किसी भी महिला को शोभा नहीं देता है. आचार्य चाणक्य के मुताबिक, स्त्री जब लालच करने लगती है तो घर की सुख-शांति भंग हो जाती है. उसके साथ ही घर के अन्य सदस्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ने लगता है. किसी भी प्रकार का लालच या लालसा रखने वाली महिला बहुत जल्द नष्ट हो जाती है.