थोक मूल्य सूचकांक में गिरावट से घटी महंगाई मगर बढ़ जायेंगे सब्जियों के दाम!

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई मुकाम हासिल किये हैं सरकार ने अपने निर्धारित लक्ष्यों के साथ साथ वित्तीय सुधार और समावेशन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किये हैं. पीएम मोदी की सरकार को 3 साल होने को हैं ऐसे में उनकी नीतियों का असर महंगाई और मुद्रा स्फीति पर दिखने लगा है.

थोक मूल्य सूचकांक में गिरावट :

मार्च में जारी किये गए आंकड़ों में पाया गया है कि विनिर्माण के क्षेत्र में वस्तुओं के दाम में नरमी आई है जिसके चलते होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी कि थोक मूल्य सूचकांक घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है. फरवरी में यह सूचकांक 6.55 प्रतिशत पर थी. वहीँ पिछले साल इस इंडेक्स में 0.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी थी.

खाद्य वस्तुओं के दाम में बढ़ोत्तरी :

लेकिन खाद्य पदार्थों की सूचकांक में विपरीत प्रभाव देखने को मिला है. खाद्य वस्तुओं के दाम में बढ़ोत्तरी हुई है. मार्च में खाद्य वस्तुओं की सूचकांक में 3.12 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई जबकि इसके पहले के महीने में यह डर 2.69 प्रतिशत थी. इस सूचकांक में ऐसे बदलाव से प्रमुख सब्जियों के दामों में बढ़ोत्तरी होगी. सब्जियों की महंगाई दर 5.70 प्रतिशत दर्ज की गई. वहीं फलों का सूचकांक 7.62 प्रतिशत पर रहा.

अंडा, मांस और मछली की महंगाई दार 3.12 प्रतिशत पर रही. जबकि ईंधन के सूचकांक में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई. यह 18.6 प्रतिशत पर रही. इससे पहले फरवरी में यह सूचकांक 21.02 प्रतिशत दर्ज की गयी थी. वहीँ विनिर्मित वस्तुओं के दाम कम हुए हैं. मार्च में विनिर्मित मुद्रास्फिति 2.99 फीसदी रही. इससे पहले फरवरी के महीने में इसे 3.66 फीसदी दर्ज किया गया था.

गौरतलब है कि जनवरी में सरकार ने मुद्रास्फीति को संशोधित कर 5.53 प्रतिशत कर दिया है. इसके अलावा इस महीने की शुरुआत में ही रिज़र्व बैंक ने समीक्षा के दौरान मुद्रास्फीति के ऊपर जाने के जोखिम की बात कही थी. साथ ही रेपो डर में कोई बदलाव नहीं किया था मगर रिवर्स रेपो डर में नीतिगत रूप से 025 प्रतिशत का बदलाव किया था. इसप्रकार रेपो रेट 6.25 और रिवर्स रेपो 6 प्रतिशत कर दिया है.

रिज़र्व बैंक के अनुसार के हिसाब से चालू वित्त वर्ष की छमाही में खुदरा मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वहीं खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में पांच महीनों के उच्च स्तर पर रहने का अनुमान है.