अध्यात्म

जानें कौन थी वो अप्सरा जिसने श्रीराम को दिया था श्राप, ये श्राप ही बना था उनकी मृत्यु का कारण

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन में कई घटनाएं ऐसी घटी थीं जिनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने अपने पिता को दिए वचन के कारण राज सिंहासन का त्याग कर दिया था और 14 वर्षों तक अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वन में रहे थे। हालांकि भगवान श्रीराम ने अपने जीवनकाल में बहुत से ऐसे फैसले भी लिए जिस पर लोग आज भी सवाल उठाते हैं। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े बहुत से किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन एक पौराणिक कथा ऐसी है जिसमें एक अप्सरा ने भगवान श्रीराम को श्राप दिया था। आपको बताते हैं भगवान श्रीराम की किस गलती को लेकर अप्सरा ने दिया था श्राप और कौन थी वो अप्सरा।

पेड़ के पीछे छिपकर श्रीराम ने किया था बाली का अंत

भगवान श्रीराम से जुड़ी पौराणिक कथाओ में से एक कथा श्रीराम और बालि के वध से जुड़ी है। किष्किंधा का राजा बाली देवराज इंद्र का पुत्र था। बाली ने बलपूर्वक अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी का अपहरण कर लिया था और सुग्रीव से सारी संपत्ति भी छीन ली थी। बाली बहुत ही शक्तिशाली था। उसके पास एक ऐसा वरदान था जिसके कारण कोई भी उसे हरा नहीं पाया था। बाली को ये शक्ति मिली थी कि उसके साथ जो भी लड़ाई लड़ेगा वो कितना ही ताकतवर क्यों ना हो उसकी आधी शक्ति बाली में चली जाएगी। इससे सामने वाला कमजोर होकर मारा जाता था।

जब सुग्रीव की मुलाकात भगवान श्रीराम से हुई तो उन्होंने अपनी ये समस्या बताई। भगवान श्रीराम ने उनसे कहा कि वो उनकी मदद जरुर करेंगे और बदले में उन्हें सीता को ढूंढने में मदद चाहिए। इसके बाद प्रभु श्रीराम खुद बाली से युद्ध करने नहीं गए बल्कि उन्होंने सुग्रीव को भेज दिया और खुद पेड़ के पीछे छिप गए। जब सुग्रीव और बाली में लड़ाई होने लगी तो सुग्रीव की आधी शक्ति उनके भाई में चली गई। इसके बाद मौका देखकर पेड़ के पीछे से प्रभु श्रीराम ने तीर चलाया और बाली का अंत किया।

बाली की पत्नी ने दिया था श्राप

सुग्रीव के बड़े भाई बाली की पत्नी तारा को जब ये खबर मिली कि भगवान श्रीराम ने पेड़ के पीछे छिपकर उसके पति की हत्या की तो उसे अपार दुख हुआ। जब उसे पता चला कि भगवान श्रीराम ने पेड़ के पीछे छिपकर छल से उसके बलवान और शक्तिशाली पति को मारा तो वो गुस्से से भर गई। वो एक अप्सरा थी जो कि समुद्र मंथन से बाली को प्राप्त हुई थी।उसने प्रभु श्रीराम को श्राप दिया कि आप अपनी पत्नी सीता को रावण से वापस पाने के बाद फिर से खो देंगे और वो हमेशा हमेशा के लिए आपसे दूर हो जाएंगी। इतना ही नहीं अगले जन्म में उनकी मृत्यु बाली के द्वारा ही होगी।

बता दें कि बाली का एक बेटा था अंगद। मृत्यु के समय बाली ने अपने पुत्र अंगद को शिक्षा दी, उसने कहा कोई भी कार्य सोच समझकर करना और किसके साथ कैसा व्यवहार करना है इस बात का विशेष ध्यान रखना। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हमेशा अपने मन में क्षमा भाव रखना , सुख-दुख का सहन करना क्योंकि ये ही जीवन का सार है। इतना कहकर बाली मृत हो गया। भगवान श्रीराम ने धर्म का साथ निभाया था, लेकिन उन्होंने छल से शत्रु  को परास्त किया था।

इसके बाद भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके सीता माता को बचाया, लेकिन फिर सीता मां उनसे हमेशा के लिए दूर हो गईं। वहीं भगवान विष्णु ने आठवां जन्म श्रीकृष्ण रुप में जन्म लिया। भगवान श्री कृष्ण के रुप में उन्हें अप्सरा तारा से जो श्राप मिल था वो इस जन्म में सच हुआ। भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु एक भील ने की थी और वो भील पूर्व जन्म में बाली ही था।

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