मायावती, संघ का विरोध करने से पहले याद रखो, एक संघी ने ही तुम्हारी जान बचाई थी…

जिस समय बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती जी  को कमरे में बंद करके मार मारकर कपडे फाड दिए थे, सपा (मुल्लायम) के गुंडो ने,मायावती के सभी चाटूकार चमचे (बसपा) वहां से भाग गए, किसी ने दलित मायावती को बचाने की हिम्मत नहीं की थी ..!

अचानक एक हीरो की एन्ट्री हुई, गेस्ट हाऊस का दरवाजा तोड़कर वो हीरो अंदर आया और मुल्लायम के सभी गुंडो से अकेले भीड गए, सभी गुंडो को मारमारकर गेस्ट हाऊस के बहार फेंक दिया ! मायावती की जान बचा ली !

मायावती, संघ का विरोध करने से पहले याद रखो, एक संघी ने ही तुम्हारी जान बचाई थी…

वो हीरो थे… उस समय के BJP विधायक “ब्रम्हदत्त द्वेदी” (RSS संघी)

बाद में जब सपाई गुंडों ने “ब्रम्हदत्त द्वेदी” की गोली मारकर हत्या कर दी थी, तब मायावती उनके घर गयी थी और खूब फुट फुटकर रोई थी..!इस काण्ड को गेस्टहाउस काण्ड कहा जाता है.. खुद मायावती ने कई बार कहा है कि.., “जब मै मुसीबत में थी, तब मेरी ही पार्टी के लोग गुंडों से डरकर भाग गये थे, लेकिन ब्रम्हदत्त द्वेदी भाई ने अपनी जान की परवाह किये बिना मेरी जान बचाई थी.”

उस घटना के बाद मायावती ने भी उनको अपना बड़ा भाई मान लिया था. मायावती बीजेपी का विरोध करती थी, लेकिन वे फर्रुखाबाद में ब्रम्हदत्त जी के लिए प्रचार भी करती थी. बाद में जब गुंडों ने ब्रम्हदत्त द्वेदी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. तब मायावती उनके घर गयी थी और खूब फुट फुटकर रोई थी.

जब उनकी विधवा चुनाव में खड़ी हुई , तब भी मायावती ने उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नही उतारा था और लोगो से अपील भी की थी कि मेरी जान बचाने के लिए दुश्मनी मोल लेकर शहीद होने वाले, मेरे भाई की विधवा को वोट दे.

RSS के संस्कार के कारण एक स्वयंसेवक विपक्षी दल की महिला की जान और इज्जत बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता है, गोली खाकर जान गवां भी देता है.. हर पीड़ित इनसान की मदद करना, हर औरत की इज्जत बचाना, यही तो करते आए है RSS के स्वयंसेवक…

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