अध्यात्मरिलेशनशिप्स

राम-सीता जैसी आदर्श जोड़ी बनानी है तो हर कपल को सिखनी चाहिए उनसे ये 3 बातें

5 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हेतु नींव रखी गई। इस राम मंदिर भूमिपूजन को देख सभी राम भक्त खुशी से प्रफुल्लित हो उठे। भगवान राम और माता सीता में कई ऐसी खूबियां थी जिसने हम भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। हर कपल राम-सीता की जोड़ी को अपना आदर्श मानता है। यदि आप अपनी शादीशुदा लाइफ को सुखी रखना चाहते हैं तो राम-सीता के वैवाहिक जीवन से कई काम की बातें सीख सकते हैं।

त्याग

भगवान राम ने पारिवारिक सुख की खातिर अपना राजपाठ छोड़ दिया था। वे 14 सालों के वनवास पर निकल गए थे। यह देख सीता मैया ने भी अपने पत्नी होने का धर्म निभाया और श्रीराम के साथ 14 साल वनवास में रहने चली गई। बता दें कि सीता माता को वनवास का नहीं कहा गया था, लेकिन अपने पति का साथ देने के लिए उन्होने भी अपनी भौतिक सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया।

बस यही त्याग वाली भावना आज के जमाने में भी लागू होना चाहिए। अब आपकी शादी लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज, एक बात तो तय है कि शादी के बाद लड़का और लड़की दोनों को ही अपनी कुछ इच्छाओं का त्याग करना पड़ता है। यदि आप इस त्याग को कर जीवनसाथी संग एडजस्ट नहीं करते हैं तो आपके शादीशुदा जीवन में कई कठिनाइयां आने लगती है। इसलिए राम-सीता की तरह अपने वैवाहिक जीवन में इसका अनुसरण अवश्य करें।

निस्वार्थ प्रेम

सच्चा प्रेम वही होता है जिसमें आपका कोई मतलब नहीं छिपा हो। जो पूर्ण निस्वार्थ भावना के साथ किया गया हो। भगवान राम और माता सीता के मध्य भी कुछ ऐसा ही प्रेम था। उन्होने एक दूसरे से बिना किसी निजी स्वार्थ के शादी रचाई थी।

हालांकि मॉडर्न जमाने में कई लोग अपने निजी स्वार्थ के चलते किसी से प्रेम या शादी करते हैं। उदाहरण के लिए किसी को पैसो का लालच होता है तो कोई दिखावे के लिए खूबसूरत और परफेक्ट लाइफ पार्टनर की तलाश करता है। यदि आपके प्रेम में भी कोई निजी स्वार्थ है तो वह रिश्ता जल्द टूट सकता है। इसलिए शादी उसी से करें जिससे आपको निस्वार्थ प्रेम हो।

ईमानदारी

भगवान राम और माता सीता के रिश्ते में पूर्ण ईमानदारी थी। वे हमेशा एक दूसरे से सच्चा प्रेम करते रहे। किसी और लालच में नहीं आए। उन्होने एक दूसरे से जो वादा किया था उसे निभाया। माता सीता को बचाने के लिए श्रीराम समुद्र तक पर कर गए थे। कई खतरनाक रक्षसों से लड़ाई की थी। वहीं रावण की लंका में रहने के बावजूद माता सीता के मन में हर पल श्रीराम ही रहते थे।

आज के जमाने में भी लोगों को अपने रिश्ते में ईमानदारी, वफादारी और कामिटमेंट पर फोकस करना चाहिए। यदि आप इन चीजों का अनुसरण करते हैं तो आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में कभी कोई दिक्कत नहीं आएगी। आपको बस अपने पार्टनर का हर मौड़ पर साथ देना है। उसकी हर दुख और तकलीफ में उसके साथ बने रहना है। फिर लोग आपको जोड़ी की भी मिसाल देंगे।

वैसे आपको भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन की कौन सी बात सबसे अच्छी लगती है?

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