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जीएसटी बिल लोकसभा में हुआ पास : पीएम मोदी, बोले – न्यू इयर, न्यू लॉ, न्यू इंडिया!

नई दिल्ली – देश में ऐतिहासिक कर सुधार व्यवस्था ‘जीएसटी’ को लागू करते हुए लोकसभा ने वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े चार विधेयकों को मंजूरी दे दी है। ‘जीएसटी’ लागू होने के बाद सरकार ने कहा है कि नई कर प्रणाली में उपभोक्ताओं और राज्यों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा और इसमें कृषि पर कर नहीं लगाया गया है। लोकसभा ने CGST: यानी सैंट्रल जी. एस.टी, SGST: यानी स्टेट जी.एस.टी, IGST: यानी इंटीग्रेटिड जी.एस.टी और UGST: संघ राज्य जी.एस.टी विधेयक 2017 को सम्मिलित चर्चा के बाद पारित कर दिया। GST Pass in Loksabha.

पीएम मोदी ने दी देशवासियों को बधाई –

पीएम मोदी ने जीएसटी के लोकसभा में पास होने के मौके पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा, ‘जीएसटी बिल पास होने पर सभी देशवासियों को बधाई। न्यू इयर, न्यू लॉ, न्यू इंडिया।’  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ये एक क्रांतिकारी बिल है जिससे इससे सामान सस्ते होंगे। जीएसटी की अलग-अलग दरों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि एक से ज्यादा टैक्स स्लैब इसलिए जरूरी है क्योंकि दो सामान पर एक जैसी ही जीएसटी की दर हो। चप्पल और बीएमडब्लू कार पर समान टैक्स नहीं लगाया जा सकता।

जीएसटी से देश को होंगे ये फायदें –

जीएसटी का सबसा बड़ा फायदा यह होगा कि अब कई अप्रत्यक्ष करों की जगह एक कर लागू होगा। दोहरा कराधान नहीं लागू होगा। पूरा देश एक बाजार के जैसा होगा, जहां एक वस्तु के अलग-अलग दाम नहीं लिये जा सकेंगे, वस्तुओं के दाम में देशभर में समानता होगी। आम लोगों के लिए कर प्रणाली सरल होगी। जीएसटी के बाद बार-बार कर लगने की प्रक्रिया खत्म होगी जिससे महंगाई घटेगी। अरुण जेटली ने यह भी कहा कि शराब को भी जीएसटी में शामिल किया जाएगा, जिसके लिए काउंसिल में 75 फीसदी बहुमत की जरूरत होगी। पेट्रो उत्पादों को भी जीएसटी में शामिल किया है, लेकिन इन पर दर शून्य है।

अटल सरकार का सपना 17 साल बाद हुआ पूरा –

‘एक देश-एक कर’ का विचार सबसे पहले अटल सरकार ने 1999 में किया था। इसके बाद साल 2006-07 में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आम बजट पेश करने के दौरान जीएसटी का विचार संसद के सामने रखा था। लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण पिछली मनमोहन सरकार ऐसा नहीं कर सकी। मोदी सरकार ने पहले तो इसका विरोध किया फिर जब केन्द्र में अपनी सरकार आयी तो इसमें कुछ बदलाव कर इसे लागू करने के प्रयास में जुट गई। इस तरह 17 साल पहले अटल बिहारी बाजपेयी ने जो सपना देखा था, वो अब पूरा हो पाया है।

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