अध्यात्म

बेहद ही अनोखा है ये मंदिर, 45 डिग्री झुकी है मां काली की गर्दन नवरात्र के दौरान हो जाती है सीधी

कंकाली माता मंदिर (Kankali Mata Temple) एक प्राचीन मंदिर है, जो कि मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। ये मंदिर मां काली को समर्पित है। यहां पर स्थापित की गई मां काली की मूर्ति देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। दरअसल यहां पर रखी गई मां काली की मूर्ति की गर्दन 45 डिग्री झुकी हुई है।

मां काली की ये देशभर में एकमात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसकी गर्दन झुकी हुई है। हैरानी की बात ये है कि इस मूर्ति की गर्दन अपने आप सीधी भी हो जाती है। कंकाली माता मंदिर तकरीबन 1731 के आस-पास बनाया गया था। हाल ही के वर्षों में खुदाई के दौरान ये मंदिर मिला है। जिसके बाद इसका अच्छे से निर्माण किया गया। इस मंदिर से कई सारी मान्यताएं जुड़ी हुई है। कुछ लोगों का माना है कि यहां के एक स्‍थानीय न‍िवासी हर लाल मेडा को मंदिर के बारे में सपना आया था। जिसके बाद यहां पर खुदाई की गई और ये मंदिर मिला।

जबकि मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष अमरसिंह मीणा ने इस मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यूपी से एक बाबा बृजमोहनदास यहां आए थे और यहां आकर इन्होंने एक कुटिया बनाई। वहीं कुटिया बनाते हुए जब उन्होंने यहां की खुदाई की मां काली की प्रतिमा निकली। जिसके बाद उन्होंने इस जगह पर मां की मूर्ति को स्थापित कर दिया। वहीं बाद में इस जगह पर मंदिर बनाया गया।

ये मंदिर करीब 23 हजार वर्गफीट में बना हुआ है। इस मंदिर के भीतरी हिस्से में 10 हजार वर्गफीट में एक हॉल बना है। खास बात ये है कि इस हॉल में एक भी पिलर नहीं है।

हो जाती है मां की गर्दन सीधी

मंदिर में स्थापित की गई मां की मूर्ति की गर्दन पूरे साल झुकी रहती है। हालांकि नवरात्रि के दौरान गर्दन सीधी हो जाती है। मंदिर के पुजारी के अनुसार साल में सिर्फ नवरात्रि के किसी एक दिन प्रतिमा की गर्दन कुछ समय के लिए सीधी होती है। लेकिन ऐसा होते किसी ने अभी तक देखा नहीं है। वहीं अगर कोई मां की मूर्ति सीधी होते हुए देख ले तो वो काफी भाग्यशाली होता है और उसकी हर मनोकामना को मां पूरा कर देती हैं। इस मंदिर में हर साल नवरात्रि के दौरान मेले का आयोजन किया जाता है और काफी संख्या में भक्त यहां आते हैं।

हो जाती है हर मुराद पुरी

इस मंदिर में आकर अगर धागा बांधते हुए कोई मुराद मांगी जाती है, तो मां उसे पूरा कर देती है। वहीं न‍ि:संतान दंपत्ति अगर यहां आकर पूजा करें। तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है। संतान प्राप्ति के लिए महिला मंदिर में उल्‍टे हाथ से गोबर छापती हैं। वहीं बच्चा होने के बाद सीधे हाथ का न‍िशान बनाती हैं।

ये मंदिर भोपाल से 18 किलोमीटर दूर रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित है। भोपाल रेल, सड़क और हवाई मार्ग से पहुंचा जा सकता है। भोपाल पहुंचकर मंदिर जाने के लिए बस गाड़ी आसनी से मिल जाएगी। मंदिर में धर्मशाला भी बनाई गई हैं। जहां पर आप रुक  सकते हैं।

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