राहुल गांधी अभी मैच्योर नहीं हुए हैं,समय लगेगा: शीला दीक्षित!

27 साल यूपी बेहाल के नारे से कांग्रेस के समर्थन में जुटी शीला दीक्षित कुछ दिनों से पार्टी के प्रचार से दूर है. लेकिन कांग्रेस और सपा के गठबंधन के पहले शीला दीक्षित ही कांग्रेस की तरफ से सीएम उम्मीदवार थीं. गठबंधन होने के बाद शीला दीक्षित ने सीएम की उम्मीदवारी छोड़ दी और उसके बाद से ही वो यूपी विधानसभा चुनाव प्रचार से नदारद हैं. अब दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसकी चर्चा राजनीति के गलियारे में हो रही है. एक अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अभी मैच्योर नहीं हुए हैं और उन्हें थोड़ा और वक्त मिलना चाहिए.

राहुल गांधी अभी मैच्योर नहीं हुए :

अखबार से बात करते हुए शीला दीक्षित ने कहा कि फिलहाल हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं और यह बदलाव जनरेशन के साथ राजनीति में भी आ रहा है. नेताओं के बयानो का स्तर भी बदला है. इसका उदाहरण इस बात से लिया जा सकता है कि पीएम से आप एक पूर्व पीएम के लिए इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं करते. कांग्रेस इस बदलाव के अनुसार खुद को ढ़ालने की कोशिश में है. यह ध्यान रखना होगा कि राहुल गांधी अभी मैच्योर नहीं हुए हैं, उन्हें अभी थोड़ा वक्त लगेगा. राहुल अभी उम्र के 40वें दौर में है. इस समय उनसे पूरी तरह परिपक्व होने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

उत्तर प्रदेश में सपा के साथ हुए गंठबंधन पर उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन से उन्हें कोई परेशानी नहीं है और वह खराब सेहत की वजह से प्रचार नहीं कर पा रहीं हैं. दिल्ली की पूर्व मुख्‍यमंत्री ने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि पहले से अब तक राहुल में काफी बदलाव आया है. राहुल ने राजनीति में काफी कुछ सीखा है. वह बैठक में शामिल होते हैं. सबसे जरूरी बात कि वह मासूमियत से अपने दिल की बात कहते नजर आते हैं. उन्होनें किसानों के हित में जो बात कही है वो अब तक किसी ने नहीं कही थी.

जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि राहुल गांधी इतने साल से सक्रिय राजनीति में है तो अब उन्हें और कितने वक्त की जरूरत है तो शीला दीक्षित ने जवाब में कहा, ”उन्होंने काफी कुछ सीखा है. वे अभी तक प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बने क्योंकि अभी ऐसा मौका आना बाकी है लेकिन वो मेहनत कर रहे हैं. वो लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें पता है कि किसी से अपनी बात कैसे कहनी चाहिए. मुझे लगता है वो जो भी करते हैं वो स्वाभाविक है लेकिन अगर किसी को ऐसा नहीं लगता तो आने वाले वक्त में उन्हें भी ऐसा लगेगा.”

अखिलेश पर बोलते हुए शीला ने कहा,अखिलेश की छवि अन्य नेताओं से काफी अच्छी है और जनता उन्हें पसंद करती है. शीला ने आगे कहा कि  मायावती के पास अखिलेश जैसी शैली नहीं है और भाजपा के पास सूबे में कोई चेहरा नहीं है.

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