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तिलिस्मी विधानसभा सीट,.इस सीट से जिसका उम्मीदवार जीतता है सरकार उसी की बनती है!

उत्तर प्रदेश की राजनीति अचंभों और विस्मयों से भरी हुई है, यहाँ 403 विधानसभा सीटें हैं. और हर सीट अपने आप में अनोखी है. हर सीट से एक अलग ही इतिहास जुड़ा हुआ है. ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक सीट ऐसी भी है जिसने बीते चार दशकों से एक अनोखा कीर्तिमान गढ़ रखा है.

यह सीट बेहद अनोखी :

इतिहास कुछ यूँ रहा है कि इस सीट से जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतता है उसी पार्टी की सरकार बनती है, यह सीट बेहद अनोखी है और अपने आप में एक इतिहास समेटे हुये है. उत्तर प्रदेश की इस अनोखी सीट का नाम कासगंज विधानसभा सीट है. इस क्षेत्र के लोगों ने हर बार उत्तर प्रदेश को सरकार देने वाली पार्टी को चुना है.

इस लिहाज से कासगंज विधानसभा सीट को तिलिस्मी विधानसभा सीट माना जाने लगा है. लोग तो यह भी कहते हैं कि अगर इस सीट का नतीजा बाकी चरण के मतदान से पहले आ जाता तो लोगों को पहले ही पता चल जाता कि किसकी सरकार बनने वाली है.

इस बार कासगंज से सपा के टिकट पर हसन उल्ला शेरवानी, बीएसपी से अजय चतुर्वेदी और बीजेपी के टिकट से देवेन्द्र राजपूत चुनाव लड़ रहे हैं. और ये तीनों प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. इतना ही नहीं कासगंज विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण भी कुछ ऐसा है जिसपर यह कह पाना थोडा मुश्किल है कि बैलट बॉक्स में किस चिन्ह की पर्चियां ज्यादा होंगी.

फ़िलहाल पहले चरण में कासगंज विधानसभा की सीट पर मतदान हो चुके हैं और अब इंतजार है ये देखने का कि कौनसी पार्टी इसपर अपना दबदबा कायम कर पाती है. इसबार के चुनावी समीकरण में कासगंज का चार दशक पुराना अनोखापन बरकरार रहता है या नहीं.

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