पिछले साल 29 सितंबर 2016 को जब LOC के दूसरी ओर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को भारतीय सेना ने तबाह कर दिया था तब सभी के मन में केवल एक ही सवाल आ रहा था कि इन वीर जवानों ने कैसे इस हमले को अंजाम दिया होगा. लेकिन उस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले जांबाज जवानों के साहस की गाथा को साझा करने से सरकार ने इनकार कर दिया. उसके बाद जब इस गणतंत्र दिवस पर इन वीर जवानों के शौर्य को सराहते हुए सरकार ने उनको वीरता पुरस्‍कार दिए तो उसके बाद से छन-छनकर उस स्‍ट्राइक के बारे में सूचनाएं निकल रही हैं. आइये आपको बताते हैं वीरों की इस वीरगाथा की कहानी, जिसे पढ़ कर आपका सीना गर्व और चौड़ा हो जाएगा.

कैसे दिया अंजाम:

इस ऑपरेशन की प्लानिंग और उसे अंजाम तक पहुंचाने में बहुत सारे लोगों का हाथ है. 28-29 सितंबर, 2016 की आधी रात, मेजर रोहित सूरी 4 पैरा के आठ जवानों के साथ गुलाम कश्मीर के भीतर आतंकी लॉन्च पैड तक पहुंच गए थे. इससे पहले कि ये कुछ एक्शन लेते, आशंकित आतंकियों ने खुद ही गोलाबारी शुरू कर दी. मेजर सूरी ने जवानों को इंतजार करने को कहा और जब सुबह छह बजे गोलाबारी बंद हुई तो वे आतंकियों पर टूट पड़े. आमने-सामने की लड़ाई के दौरान यूएवी के मार्फत दो आतंकियों के भागने की जानकारी मिली. रोहित सूरी ने जान की परवाह किए बिना आतंकियों का पीछा कर नजदीकी लड़ाई में दोनों को मार गिराया. सूरी ने ऐसा नहीं किया होता, सभी जवानों की जान खतरे में पड़ सकती थी. इस वीरता के लिए मेजर सूरी को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया.

क्या है दस्तावेज में:

अंग्रेजी वेबसाइट ‘द टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ ने इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वैसे तो इस ऑपरेशन में अनेक लोग शामिल थे लेकिन 19 जवान इस अभियान का केंद्रीय हिस्‍सा थे. रिपोर्ट में इस ऑपरेशन को फील्ड में अंजाम देने की पूरी जानकारी उपलब्ध है.  दस्तावेज के मुताबिक, पैरा रेजिमेंट के 4th और 9th बटैलियन के एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सूबेदार, दो नायब सूबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैराट्रूपर्स ने सर्जिकल स्ट्राइक को अपने अंजाम तक पहुंचाने का काम किया. 4th पैरा के अफसर मेजर रोहित सूरी को कीर्ति चक्र और कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हरप्रीत संधू को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित गया है. इस टीम को चार शौर्य चक्र और 13 सेवा मेडल भी प्रदान किये गए हैं. कर्नल हरप्रीत संधू को लॉन्च पैड्स पर दो लगातार हमले करने का काम सुपूर्द किया गया था. हमले की योजना बनाने और उसके सफल क्रियान्यवन के लिए ही उन्हें युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित गया है.

पूरी तैयारी के साथ चलाया था ऑपरेशन:

गुलाम कश्मीर में एक साथ कई आतंकी शिविरों पर स्ट्राइक करने के लिए रेकी टीमें पहले ही कूच कर गई थीं। सात-आठ जवानों से लैस हर स्ट्राइक टीम में सभी की जिम्मेदारी अलग-अलग थी. उन्हें कवर करने और सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी अलग टीम को दी गई थी.

एक विशेष टीम लांच पैड की सुरक्षा में तैनात संतरियों को मारने के लिए भेजी गई थी. आवाजरहित हथियारों से लैस इस टीम में सेना के शार्प शूटर शामिल थे. इसके अलावा पूरे ऑपरेशन पर मानव रहित विमानों से नजर रखी जा रही थी. आतंकियों की हर हरकत के बारे में स्ट्राइक टीम में लगे जवानों को जानकारी भी दी जा रही थी. इस पूरे मिलिट्री ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यह भी रही कि इसमें कोई सैनिक शहीद नहीं हुआ. बस सर्विलांस टीम का एक सदस्‍य जख्‍मी हुआ.

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