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नागा लड़के ने की बंदरों से चालाकी, हुअा यह अंजाम

त्रिपुरा में लोगाड़ी नदी के किनारे कुछ कूकी नागा परिवार रहते थे। इन्हीं लोगों में एक गरीब लड़का भी रहता था। उसका नाम था मागुरा। वह बस्ती से दूर एक झोपड़ी में रहता था। जानवरों से उसे बहुत प्यार था। जंगली जानवर उसे कभी नुकसान नहीं पहचानते थे। एक दिन मागुरा जंगल में शिकार खेलने गया। शिकार की तलाश में वह दूर तक निकल गया। जब सांझ ढलने लगी, तो उसने जंगली फल खाकर पानी पिया और एक पेड़ के नीचे लेट गया। कुछ समय बाद उसी पेड़ पर बंदरों का एक झुंड आ पहुंचा। उन्होंने मागुरा के हथियार देखे, तो जान गए कि उसे शिकार नहीं मिला।

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दयालु बंदरों ने आपस में सलाह की, क्यों न हम इस व्यक्ति की मदद करें? वे मागुरा के पास गए। देखा वह गहरी नींद में था। बहुत देर तक वह नहीं जागा, तो बंदरों का दल विचार करने लगा। उनका नेता बोला, लगता है, बेचारा मर गया। देखो, हिल भी नहीं रहा है। दूसरे बंदर ने सलाह दी, इसे गांव में छोड़ आना चाहिए। लोग इसका क्रियाकर्म कर देंगे। उदास और भारी मन लिए बंदरों ने मागुरा और उसके थैलों को उठाया तथा चल दिए। सारे रास्ते मागुरा बेसुध सोता रहा।

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